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नवीन जिंदल ने छत्तीसगढ़ सरकार पर सवाल उठाए: वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ FIR पर विवाद
सुनील कुमार ने लिखा है
18-Apr-2026 11:14 AM
नवीन जिंदल ने छत्तीसगढ़ सरकार पर सवाल उठाए: वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल के खिलाफ FIR पर विवाद

‘छत्तीसगढ़’ न्यूज डेस्क

नई दिल्ली/रायपुर, 18 अप्रैल। बीजेपी सांसद और जिंदल स्टील एंड पावर के चेयरमैन नवीन जिंदल ने छत्तीसगढ़ सरकार की कार्रवाई पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि रायगढ़ में वेदांता की पावर प्लांट में हुई दुर्घटना में 20 मजदूरों की मौत बेहद दर्दनाक है। पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और आजीविका सहायता मिलनी चाहिए।

नवीन जिंदल ने कहा कि बिना किसी जांच के वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल का नाम FIR में डालना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने लिखा कि अनिल अग्रवाल एक साधारण और पिछड़े समुदाय से आने वाले स्वनिर्मित व्यक्ति हैं, जिन्होंने शून्य से वैश्विक उद्यम खड़ा किया। उस पावर प्लांट के दैनिक संचालन में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी।

उन्होंने पूछा कि जब सरकारी प्लांट या रेलवे में दुर्घटना होती है तो क्या चेयरमैन का नाम FIR में डाला जाता है? नहीं डाला जाता। फिर निजी क्षेत्र के साथ दोहरा मानक क्यों अपनाया जा रहा है? नवीन जिंदल ने जोर देकर कहा कि पहले पूरी जांच हो, सबूतों के आधार पर जिम्मेदारी तय हो, उसके बाद कार्रवाई की जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर निवेशकों को लगेगा कि बिना सबूत के उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है तो वे भारत में निवेश करने से डरेंगे। इससे विकसित भारत के लक्ष्य को नुकसान पहुँचेगा।

 

रायगढ़ जिले में वेदांता ग्रुप की जिंदल पावर प्लांट में हाल ही में हुई दुर्घटना में 20 मजदूरों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने अनिल अग्रवाल समेत कई अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। सरकार का आरोप है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ।

नवीन जिंदल के इस पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा पैदा कर दी है। बीजेपी के कई नेताओं ने उनका समर्थन किया है। वहीं छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि 20 मजदूरों की मौत हुई है, इसलिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।

यह मामला छत्तीसगढ़ और केंद्र दोनों जगह भाजपा सरकार होने के बावजूद राजनीतिक टकराव को उजागर करता है। नवीन जिंदल ने साफ कहा है कि दुर्घटना की सही जांच होनी चाहिए, लेकिन बिना सबूत के किसी उद्योगपति का नाम FIR में डालना निवेशकों के भरोसे को तोड़ने वाला कदम है।


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