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‘छत्तीसगढ़’ न्यूज डेस्क
वाशिंगटन, 18 अप्रैल। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वाशिंगटन में बाइबिल की एक मैराथन रीडिंग कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। आयोजकों ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की। यह घटना ऐसे समय में हो रही है जब ट्रंप ने हाल ही में पोप पर तीखा हमला किया था और एक इमेज शेयर करके ईसाई समुदाय में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था।
आयोजकों ने बताया कि ट्रंप इस कार्यक्रम में शामिल होकर बाइबिल के कुछ अंश पढ़ेंगे। यह कार्यक्रम ईसाई मूल्यों और अमेरिकी समाज में बाइबिल की भूमिका पर जोर देने के लिए आयोजित किया जा रहा है।
विवाद की पृष्ठभूमि
इस घोषणा से एक हफ्ते पहले ट्रंप ने पोप पर निशाना साधा था। उन्होंने वेटिकन पर “खराब प्रबंधन” का आरोप लगाते हुए कहा था कि वेटिकन “बहुत बुरे तरीके से चलाया जा रहा है”। इसके अलावा ट्रंप ने एक इमेज शेयर की थी जिसमें उन्हें यीशु मसीह की तरह दिखाया गया था — किसी मरीज को चमत्कारिक तरीके से ठीक करते हुए।
इस इमेज पर ईसाई समुदाय में भारी विरोध हुआ। कई धार्मिक संगठनों और ईसाई नेताओं ने इसे “अपमानजनक” और “ब्लास्फेमी” करार दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता को खुद को यीशु मसीह के समकक्ष नहीं दिखाना चाहिए।
ट्रंप के इस कदम पर वेटिकन की ओर से भी नाराजगी जताई गई थी। कुछ ईसाई समूहों ने इसे “धार्मिक भावनाओं का अपमान” बताया।
ट्रंप का बचाव
ट्रंप के समर्थकों का कहना है कि यह इमेज सिर्फ प्रतीकात्मक थी और ट्रंप अमेरिका में ईसाई मूल्यों को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन विरोधी पक्ष इसे ट्रंप की “अहंकारी” छवि का हिस्सा बता रहा है।
अब ट्रंप का बाइबिल रीडिंग कार्यक्रम में शामिल होना इस विवाद को और बढ़ा सकता है। कुछ लोग इसे “क्षमा माँगने” या “ईसाई समुदाय को खुश करने” की कोशिश मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे “राजनीतिक stunt” बता रहे हैं।
कार्यक्रम की जानकारी
आयोजकों ने कहा कि यह मैराथन रीडिंग कई दिनों तक चलेगी जिसमें बाइबिल के विभिन्न अध्याय पढ़े जाएंगे। ट्रंप के अलावा कई प्रमुख ईसाई नेता और राजनेता भी इसमें भाग लेंगे।
ट्रंप के इस कदम पर अभी ईसाई समुदाय के अलग-अलग गुटों की प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। कुछ इसे सकारात्मक मान रहे हैं, जबकि कुछ अभी भी पिछले विवाद को लेकर नाराज हैं।
यह घटना अमेरिकी राजनीति में धर्म और राजनीति के गहरे जुड़ाव को एक बार फिर उजागर करती है।


