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फिरोजाबाद में डीएम पर महिला तहसीलदार के भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के गंभीर आरोप
18-Apr-2026 1:18 PM
फिरोजाबाद में डीएम पर महिला तहसीलदार के भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के गंभीर आरोप

‘छत्तीसगढ़’ न्यूज डेस्क

फिरोजाबाद, 18 अप्रैल। उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद जिला इन दिनों प्रशासनिक खेमे में मची भारी उथल-पुथल का केंद्र बना हुआ है। जिले के जिलाधिकारी (DM) रमेश रंजन और टूंडला की तहसीलदार राखी शर्मा के बीच का आपसी विवाद अब सार्वजनिक होकर मुख्यमंत्री की चौखट तक पहुँच गया है। तहसीलदार राखी शर्मा ने जिलाधिकारी पर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और मानसिक उत्पीड़न के सनसनीखेज आरोप लगाते हुए प्रदेश सरकार से न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है।

इस पूरे विवाद की जड़ में करोड़ों रुपये का एक संदिग्ध जमीन घोटाला बताया जा रहा है। राखी शर्मा का दावा है कि जिलाधिकारी के संरक्षण में जिले के कई अधिकारी और कलेक्ट्रेट के कर्मचारी जमीन के अवैध खेल में शामिल हैं। तहसीलदार ने आरोप लगाया कि उन पर एक करोड़ रुपये के जमीन घोटाले से जुड़ी जांच में मनमाफिक और गलत रिपोर्ट देने के लिए लगातार दबाव बनाया गया। उनके अनुसार, जब उन्होंने इस भ्रष्टाचार का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया, तो उनके खिलाफ प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई शुरू कर दी गई और पिछले नौ महीनों से उनकी सैलरी भी रोक दी गई है।

मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा रिश्वत के रूप में महंगे गैजेट्स के लेन-देन को लेकर हुआ है। राखी शर्मा ने मीडिया के सामने बयान दिया कि उनके खिलाफ चल रही एक पुरानी जांच को रफा-दफा करने के नाम पर उनसे 1.75 लाख रुपये का 'आईफोन' और एक 'आईवॉच' की मांग की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि दबाव में आकर उन्होंने ये महंगे सामान खरीदकर दिए, जिनका उपयोग कथित तौर पर जिलाधिकारी द्वारा किया जा रहा है। इसके अलावा, महिला अधिकारी ने डीएम कैंप ऑफिस में उन्हें बंधक बनाकर डराने-धमकाने और हाईकोर्ट से अपनी याचिका वापस लेने के लिए मजबूर करने का भी गंभीर आरोप जड़ा है।

फिलहाल, इस प्रशासनिक टकराव ने जिले की व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। एक तरफ जहाँ तहसीलदार राखी शर्मा ने अपनी जान को खतरा बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर जांच की मांग की है, वहीं दूसरी तरफ जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। टूंडला से शिकोहाबाद तक इस विवाद की चर्चा आम है, और अब सबकी निगाहें शासन द्वारा की जाने वाली संभावित जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।


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