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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 16 फरवरी। कोटा क्षेत्र में एक बाघिन के अपने दो शावकों के साथ विचरण की पुष्टि हुई थी। अब रविवार को मवेशी के शिकार की सूचना मिली है। अचनाकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने इलाके में ट्रैप कैमरे लगा दिए हैं, ताकि उसकी तस्वीर मिल सके और गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
घटना स्थल वन विकास निगम के अधिकार क्षेत्र में आता है। पिछले तीन दिनों से इलाके में बाघिन और दो शावकों के घूमने की खबरें मिल रही थीं। जगह-जगह उनके पगमार्क (पंजों के निशान) देखे गए, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से दर्शन नहीं हुए।
एटीआर प्रबंधन, वन विकास निगम और बिलासपुर वन मंडल की संयुक्त टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। विशेष टाइगर सुरक्षा बल के जवानों को भी अलर्ट पर रखा गया है।
तलाशी के दौरान पटैता बैरियर से करीब एक किलोमीटर अंदर जंगल में मवेशी के मारे जाने की सूचना मिली। मौके पर पहुंची टीम ने पाया कि शिकार का तरीका बाघिन से मेल खाता है।
अधिकारियों का कहना है कि आम तौर पर शिकार के बाद बाघ या बाघिन दोबारा उसी स्थान पर लौटते हैं। इसलिए ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, ताकि उनकी तस्वीर कैद हो सके।
वन विभाग की चिंता यह है कि बाघिन टाइगर रिजर्व की सीमा से बाहर कैसे आई। अधिकारियों का कहना है कि बाघिन और शावकों की सुरक्षा जरूरी है। गांव की सीमा से लगे जंगल में जंगली सूअर का शिकार करने वाले कुछ लोग सक्रिय रहते हैं। इस कारण वन अमला यह भी जांच कर रहा है कि कहीं जंगल में फंदे तो नहीं लगाए गए। अभी तक ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है।
जंगली जानवर द्वारा मवेशी मारने की स्थिति में मुआवजे का प्रावधान है। कोटा रेंज में हुई इस घटना में वन विकास निगम ने मुआवजा प्रकरण तैयार कर अचनाकमार टाइगर रिजर्व को भेज दिया है।
एटीआर प्रबंधन द्वारा संबंधित पशु मालिक को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।


