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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि यूपीए सरकार के दौरान आर्थिक कुप्रबंधन की वजह से ट्रेड पर बात नहीं हो सकी.
समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान ट्रेड बातचीत की कड़ी आलोचना की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यूपीए सरकार के "इकोनॉमिक मिसमैनेजमेंट" की वजह से भारत भरोसे की स्थिति से बातचीत नहीं कर पाया और कभी कोई बातचीत पूरी नहीं कर सका.
पीएम मोदी ने कहा, "ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, ब्रिटेन, यूरोपियन यूनियन और अमेरिका के साथ भारत के समझौतों ने एमएसएमई ख़ासकर लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स के लिए, इन इलाक़ों में लगभग ज़ीरो टैरिफ या दूसरे एक्सपोर्ट करने वाले देशों की तुलना में बहुत कम टैरिफ़ पर एक्सपोर्ट करने का रास्ता खोल दिया है."
प्रधानमंत्री ने कहा, "ये ट्रेड एग्रीमेंट भले ही हाल ही में हुए हों, लेकिन ये ज़्यादा प्रतिस्पर्धी घरेलू उद्योग, एक आत्मविश्वास से भरा अप्रोच और एक खुले नज़रिए का नतीजा हैं."
पीएम मोदी ने कहा, "आज की दुनिया में ये बहुत कम देखने को मिलते हैं. इससे पहले कि हम हाल के सालों में भारत के सफल ट्रेड एग्रीमेंट्स के बारे में बात करें, यह याद रखना ज़रूरी है कि हम एक दशक पहले कहाँ खड़े थे."
कांग्रेस ने दिया जवाब
पीएम मोदी के आरोपों पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा है कि जिस न्यूक्लियर डील के ख़िलाफ़ बीजेपी पूरा हंगामा करती थी, वो यूपीए सरकार के दौरान हुई थी.
पवन खेड़ा ने कहा, "यूपीए के दौरान डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहीं कोई सरेंडर नहीं किया था. ये (पीएम मोदी) तो लगातार सरेंडर कर रहे हैं. कभी चीन के सामने, कभी एपस्टीन के सामने, कभी अमेरिका के सामने. जहां देखो सरेंडर किए जा रहे हैं."
उन्होंने सवाल किए, "ऐसी कोई ड्रेड डील लाता है? जी हां, यूपीए के समय इस तरह की सरेंडर वाली कोई डील हमने नहीं की, ये मैं मानता हूं. अगर वो (पीएम मोदी) प्राइवेट सेक्टर के इतने बड़े हिमायती होते तो नोटबंदी नहीं करते. एमएसएमई को ऐसे डुबोते नहीं."
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया, "अगर प्राइवेट सेक्टर के इतने बड़े हमायती होते तो जीएसटी इस तरह से नहीं लाते, जिस तरह से लाया. ये जो बोलते हैं, इस पर कभी भरोसा मत कीजिए. ये बोलते कुछ हैं, करते कुछ और हैं." (bbc.com/hindi)


