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हाईकोर्ट ने जमानत याचिका ठुकराई, अपराधियों के संपर्क में लौटने की आशंका जताई
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 11 फरवरी। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने हत्या के प्रयास के एक नाबालिग आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भले ही किशोर न्याय कानून में जमानत सामान्य नियम है, लेकिन यदि रिहाई से आरोपी के दोबारा आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने की आशंका हो, तो याचिका निरस्त की जा सकती है।
पचपेड़ी थाना क्षेत्र में 26 नवंबर 2025 की रात करीब 8 बजे शराब को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। आरोप है कि कमल कुमार महिलांगे, राकेश और जयेश के साथ मिलकर नाबालिग ने पीड़ित और उसके साथियों पर हमला किया।
जब पीड़ित को बचाने उसके मित्र राजेंद्र और फूलचंद पहुंचे, तब नाबालिग ने राजेंद्र के पेट में चाकू घोंप दिया और फूलचंद के सीने पर वार किया। घटना के बाद पुलिस ने बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर 27 नवंबर को नाबालिग को बाल संरक्षण गृह भेज दिया था।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल की एकलपीठ ने कहा कि आरोपी का परिवार आपराधिक गतिविधियों, विशेषकर अवैध शराब के कारोबार से जुड़ा रहा है। राज्य की ओर से प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, घटना में प्रयुक्त चाकू नाबालिग से बरामद किया गया।
यह भी बताया गया कि नाबालिग के पिता कमल कुमार के विरुद्ध पूर्व से अवैध शराब के प्रकरण दर्ज हैं। आरोप है कि वह अपने बेटों के साथ मिलकर अवैध धंधा संचालित करता है और अपराध में बच्चों का उपयोग करता है।
हाई कोर्ट ने निचली अदालत और किशोर न्याय बोर्ड के आदेश को यथावत रखते हुए कहा कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 12 के तहत जमानत सामान्यतः दी जाती है, किंतु यदि इससे न्याय के उद्देश्य प्रभावित हों या आरोपी के असामाजिक तत्वों से पुनः जुड़ने की आशंका हो, तो जमानत देने से मना किया जा सकता है।
प्रोबेशन अधिकारी की रिपोर्ट में भी उल्लेख किया गया कि नाबालिग उचित मार्गदर्शन के अभाव में असामाजिक तत्वों के संपर्क में है। ऐसे में उसे संरक्षण गृह में रखना उसके सुधार और भविष्य के हित में है।


