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नयी दिल्ली, 10 फरवरी। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र सहित 17 राज्यों को नोटिस जारी कर विशेष एनआईए अदालतों की स्थापना सुनिश्चित करने को कहा जहां आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत 10 या अधिक मामले लंबित हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा एक व्यापक वस्तु स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद राज्यों से जवाब मांगा। रिपोर्ट में कहा गया कि मंत्रालय ने उन राज्यों में विशेष अदालतें स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है जहां राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के 10 या अधिक मामले लंबित हैं।
पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की दलीलों पर गौर किया कि गृह मंत्रालय ने इन विशेष अदालतों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के संबंध में मानदंडों को अंतिम रूप दे दिया है।
दलीलों का संज्ञान लेते हुए, पीठ ने 17 राज्यों के मुख्य सचिवों से ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई और न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालतों की स्थापना को औपचारिक रूप देने के लिए रिपोर्ट पर तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा। पीठ ने कहा कि अगर लंबे मुकदमे के बाद किसी आरोपी को बरी कर दिया जाता है तो मुकदमे में देरी से अन्याय होता है।
विधि अधिकारी ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में राउज एवेन्यू कोर्ट कॉम्प्लेक्स में विभिन्न विशेष कानूनों के तहत 16 विशेष अदालतें स्थापित की जा रही हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एनआईए अधिनियम, गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) और मादक पदार्थ पर रोकथाम संबंधी ‘एनडीपीएस’ अधिनियम सहित विशेष कानूनों के लिए समर्पित ये अदालतें अप्रैल 2026 तक संचालन के लिए तैयार होने की उम्मीद है। इसमें कहा गया है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुष्टि की है कि दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा के न्यायिक अधिकारी इन अदालतों की अध्यक्षता के लिए उपलब्ध हैं। (भाषा)


