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एसआईआर : मतदाता नाम विलोपन फार्म पर जंग
10-Feb-2026 5:11 PM
एसआईआर : मतदाता नाम विलोपन फार्म पर जंग

कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने, आपत्ति-दावा सुनवाई, 4 दिन बाकी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 10 फरवरी। प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया चल रही है। आपत्ति-दावों पर सुनवाई में 4 दिन बाकी रह गए हैं। इस कड़ी में मतदाता नाम विलोपन के लिए प्रयुक्त फार्म-7 के दुरूपयोग की शिकायतें भी आई है। भाजपा ने तो प्रदेशभर में 2 लाख से अधिक फार्म भरे हैं। इसका सत्यापन चल रहा है। इस पर कांग्रेस ने आपत्ति भी की है। इन सबके बीच चुनाव आयोग ने सभी राज्यों के निर्वाचन आयोग को लिखा है कि अनाधिकृत व्यक्तियों द्वारा अत्यधिक संख्या में फार्म-7 प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इस पर कार्रवाई करने के लिए भी लिखा है।

प्रदेशभर में एसआईआर का काम चल रहा है। इसको लेकर खींचतान चल रही है। 14 तारीख तक एसआईआर होना है, और 21 तारीख को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा। इन सबके बीच कांग्रेस और भाजपा में जंग छिड़ी हुई है। भाजपा ने प्रदेशभर में 2 लाख से अधिक फार्म-7 भरे हैं, जिसमें मृत लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज है।  इसके अलावा स्थान छोड़ चुके लोग भी शामिल हैं। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता डॉ. विजय शंकर मिश्रा ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि बूथवार परीक्षण के बाद फार्म-7 भरे गए हैं। पूरे प्रदेशभर में यह संख्या 2 लाख से अधिक हो सकती है।

प्रक्रिया को लेकर शिकवा-शिकायतें आ रही हैं। हालांकि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार साफ कर चुके हैं कि मतदाता सूची से नाम विलोपन को लेकर फैलाए जा रहे दावे भ्रामक हैं। मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 की धारा 22 के अंतर्गत किसी भी मतदाता का नाम केवल निम्नलिखित 3 विशेष परिस्थितियों में ही हटाया जा सकता है। मतदाता की मृत्यु पर, मतदाता के निवास स्थान का स्थायी रूप से अन्यत्र स्थानांतरण होने पर, और मतदाता का नाम दोहरा दर्ज होने पर। यदि कोई मतदाता ईआरओ के फैसले से असहमत है, तो अपील करने का अधिकार है। 

दूसरी तरफ, मतदाता नाम विलोपन के लिए प्रयुक्त फार्म-07 के दुरुपयोग को लेकर आरोप तो लगा रही है।  सभी जिलों में शिकायत भी हुई है।  प्रदेश कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धनेन्द्र साहू और महामंत्री शैलेष नितिन त्रिवेदी की अगुवाई में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार से लगातार मिलकर शिकायत भी कर चुके हैं। इससे परे जिला अध्यक्षों को आपत्ति दर्ज कराने के लिए कहा गया है, लेकिन मात्र 4 दिन बाकी हैं, और सभी जिला अध्यक्ष ट्रेनिंग में दिल्ली गए हुए हैं। इससे पार्टी में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

पार्टी का आरोप है कि भाजपा द्वारा सामूहिक रूप से फर्जी तरीके से फार्म-07 भरकर बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सभी जिलों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अपने पत्र में जिला निर्वाचन अधिकारियों से फार्म-07 के माध्यम से प्राप्त आपत्तियों और उनकी अद्यतन स्थिति की जानकारी पीडीएफ प्रारूप में अनिवार्य रूप से प्राप्त करने को कहा है।

कांग्रेस का कहना है कि कई स्थानों पर अस्तित्वहीन या फर्जी व्यक्तियों द्वारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग, गरीब मजदूर और किसानों को निशाना बनाकर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। खरसिया में तो दो एफआईआर भी कराई है।

पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए लॉजिकल व मिसमैच एरर के आधार पर जारी गलत नोटिसों को रद्द कराने के लिए बीएलओ और ईआरओ के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा है। विशेष रूप से 2003 की उपनाम-रहित मतदाता सूची और वर्तमान उपनाम-युक्त सूची के कारण उत्पन्न मिसमैच एरर को आधार बनाकर जारी नोटिसों पर आपत्ति दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

पार्टी ने नगर, ब्लॉक, मंडल और बूथ स्तर के पदाधिकारियों से अपील की है कि 14 फरवरी 2026 तक चलने वाली अंतिम सुनवाई और सत्यापन प्रक्रिया के दौरान पूरी सक्रियता के साथ पात्र मतदाताओं के नाम विलोपित होने से बचाएं और जहां नाम हटाए गए हैं, वहां पुन: दर्ज कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करें।


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