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तीन मामलों में 10 लाख से ज्यादा की रकम उड़ाई
बिना ओटीपी ही खाली हो रहे खाते, कहीं आरटीओ ई-चालान तो कहीं बीमा और ट्रैफिक फाइन का झांसा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 8 फरवरी। जिले में साइबर ठगों ने अलग-अलग तरीकों से आम नागरिकों को निशाना बनाते हुए लाखों रुपये की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दिया है। कहीं फर्जी आरटीओ ई-चालान के नाम पर एपीके फाइल भेजी गई, तो कहीं हेल्थ इंश्योरेंस और ट्रैफिक चालान का झांसा देकर लिंक खुलवाया गया। तीन अलग-अलग मामलों में साइबर अपराधियों ने कुल मिलाकर 10 लाख रुपये से अधिक की राशि हड़प ली है। पुलिस ने सभी मामलों में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सकरी थाना क्षेत्र के उसलापुर, आनंद नगर निवासी एक स्वास्थ्यकर्मी ने पुलिस को बताया कि 3 फरवरी की सुबह करीब 10 बजे उसके मोबाइल पर वाट्सऐप के जरिए एक संदेश आया। भेजने वाले नंबर की प्रोफाइल फोटो में परिवहन विभाग का लोगो लगा था और मैसेज में उसकी बाइक का नंबर लिखकर ई-चालान जारी होने की बात कही गई थी।
मैसेज में चालान देखने के लिए एक एपीके फाइल लिंक दिया गया था। जैसे ही पीड़ित ने लिंक खोला, उसका मोबाइल हैक हो गया और महज पांच मिनट के भीतर अलग-अलग यूपीआई ट्रांजैक्शन के जरिए 5 लाख 1,199 रुपये खाते से निकाल लिए गए। हैरानी की बात यह रही कि पीड़ित ने न तो कोई ओटीपी साझा किया और न ही किसी कॉल का जवाब दिया था।
पुलिस के अनुसार, ठग पहले किसी का मोबाइल नंबर हैक करते हैं और फिर उसी नंबर से फर्जी आरटीओ चालान की एपीके फाइल भेजकर लोगों को जाल में फंसाते हैं।
इधर, तारबाहर थाना क्षेत्र में साइबर ठगों ने एक कारोबारी को निशाना बनाया। विनोबा नगर निवासी सुमित जैन (42) ने शिकायत दर्ज कराई कि 2 फरवरी को दोपहर करीब 2 बजे उसके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को कंपनी प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उसके नाम से हेल्थ इंश्योरेंस एक्टिव हो गया है।
जब कारोबारी ने इंश्योरेंस लेने से इनकार किया, तो आरोपी ने योजना बंद कराने के लिए लिंक भेजने की बात कही। जैसे ही पीड़ित ने लिंक खोला, उसके क्रेडिट कार्ड से 1 लाख 68 हजार 720 की राशि कट गई। कुछ देर बाद ट्रांजैक्शन मैसेज आने पर ठगी का पता चला। इसके बाद पीड़ित ने तुरंत बैंक से संपर्क कर कार्ड ब्लॉक कराया और साइबर सेल व थाने में शिकायत दर्ज कराई।
तीसरा मामला सिरगिट्टी थाना क्षेत्र के तिफरा, यदुनंदन नगर का है। यहां निजी अस्पताल में मैनेजर के पद पर कार्यरत मनीष कुमार सोनी (38) को 2 फरवरी की सुबह एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप मैसेज मिला। मैसेज में 2,000 रुपये का ट्रैफिक फाइन लगने की जानकारी दी गई और साथ में एपीके फाइल भेजी गई।


