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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 8 फरवरी। जिले में कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान फिर सतह पर आ गई है। इस बार विवाद की वजह मनरेगा बचाव संग्राम के दौरान लगाए गए बैनर और पोस्टर बने, जिनमें पार्टी के शीर्ष प्रदेश नेतृत्व की तस्वीरें नहीं लगाई गईं। मामले में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री पर अनुशासनहीनता का आरोप लगा है, जिसके बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
कांग्रेस में हाल ही में संगठन सृजन की प्रक्रिया के तहत जिला और शहर कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्ष नियुक्त किए गए थे। इस पहल को पार्टी नेता राहुल गांधी के संगठनात्मक सुधार अभियान से जोड़कर देखा जा रहा था। माना जा रहा था कि इससे पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी और स्थानीय स्तर पर आपसी समन्वय मजबूत होगा। बिलासपुर में इसके उलट स्थिति देखने को मिल रही है। यहां न केवल जिला स्तर पर बल्कि प्रदेश स्तर तक खेमेबाजी के संकेत मिलने लगे हैं।
बीते दिनों कोटा ब्लॉक में आयोजित मनरेगा बचाव महासंग्राम के दौरान कांग्रेस ने पदयात्रा निकाली। इस कार्यक्रम में एआईसीसी सचिव व सह प्रभारी विजय जांगिड़, मनरेगा बचाओ अभियान के प्रदेश समन्वयक और पूर्व मंत्री उमेश पटेल सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र में लगाए गए झंडों, बैनरों और पोस्टरों में एआईसीसी महासचिव व प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की तस्वीरें नहीं थीं। इसे पार्टी लाइन से हटकर किया गया कदम माना गया।
इस पूरे घटनाक्रम को प्रदेश कांग्रेस ने गंभीरता से लिया है। पीसीसी के संगठन महामंत्री ने जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। पार्टी का मानना है कि ऐसे कदम संगठनात्मक अनुशासन और एकजुटता को कमजोर करते हैं।
मालूम हो कि कांग्रेस ने संगठन को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति छह-छह महीने के परीक्षण कार्यकाल पर करने का निर्णय लिया है। इस अवधि में उनके कामकाज का मूल्यांकन किया जाएगा।
मूल्यांकन में संगठनात्मक गतिविधियों, जनसंपर्क, सदस्यता अभियान और स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता को आधार बनाया जाएगा। प्रदर्शन संतोषजनक न होने पर जिलाध्यक्ष को बदले जाने की भी व्यवस्था रखी गई है।


