ताजा खबर
हाईकोर्ट ने जनपद पंचायत का फैसला किया निरस्त
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 8 फरवरी। सेवा के दौरान दिवंगत हो चुके ग्राम सचिव की पत्नी को हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता पत्नी को शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति के लिए हकदार है और विभाग द्वारा आवेदन निरस्त किया जाना उचित नहीं है।
मामले के अनुसार, महेंद्र कुमार राय जनपद पंचायत मस्तूरी के अंतर्गत ग्राम सचिव के पद पर कार्यरत थे। 19 जनवरी 2020 को सेवा अवधि के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद उनकी पत्नी रामकुमारी राय ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया।
जिला पंचायत बिलासपुर और जनपद पंचायत मस्तूरी ने रामकुमारी राय के आवेदन को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि उन्होंने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण नहीं की है, जो न्यूनतम योग्यता बताई गई। बाद में विभाग की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि आवेदन समय-सीमा के बाद प्रस्तुत किया गया है, जबकि नियमों के अनुसार आवेदन एक माह के भीतर दिया जाना होता है और अधिकतम तीन माह की अवधि का प्रावधान है।
विभाग की उपेक्षा से आहत रामकुमारी राय ने अपने अधिवक्ता धीरेंद्र पांडेय के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि राज्य शासन के नियमों के अनुसार कर्मचारी की मृत्यु के एक माह के भीतर विभाग को परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन पत्र उपलब्ध कराना अनिवार्य है। साथ ही अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में कोई अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता नहीं होती, बल्कि आवेदक की पात्रता और उपलब्ध योग्यता के अनुसार पद दिया जाता है।
मामले की सुनवाई एकलपीठ के न्यायाधीश पार्थ प्रतिम साहू ने की। सुनवाई के बाद न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा विभाग को दिया गया आवेदन नियत समय-सीमा के भीतर माना जाएगा। साथ ही शासन का एक स्पष्ट परिपत्र भी मौजूद है, जिसमें अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है।
हाईकोर्ट ने जिला और जनपद पंचायत के निर्णय को अनुचित मानते हुए शासन को निर्देश दिया है कि रामकुमारी राय को नियमों के अनुरूप अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए।


