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14 महिलाएं शामिल, हथियार सौंपे
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
सुकमा, 7 फरवरी। जिला सुकमा में शनिवार को सुकमा पुलिस एवं विशेष सशस्त्र बल के संयुक्त प्रयासों से माओवादी संगठन से जुड़े 21 कैडरों ने आत्मसमर्पण किया। पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों पर कुल 76 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिनमें 14 महिलाएं शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पित कैडरों में डीवीसीएम रैंक के 3, एसीएम रैंक के 5 तथा पार्टी मेंबर रैंक के 13 सदस्य शामिल हैं। ये कैडर दरभा डिवीजन, दक्षिण बस्तर डिवीजन, केकेबीएन डिवीजन (ओडिशा) एवं इंद्रावती एरिया कमेटी में सक्रिय बताए जा रहे थे।

आत्मसमर्पण के दौरान एके-47, एसएलआर, इंसास, बीजीएल लॉन्चर सहित अन्य हथियार एवं एम्युनेशन पुलिस के समक्ष जमा कराए गए। पुलिस के अनुसार ये कैडर छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति तथा ‘पूना मारगेम - पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लेकर सामने आए।
पुलिस का दावा है कि हाल के वर्षों में नए सुरक्षा कैम्पों की स्थापना, सडक़ संपर्क, तथा नक्सल विरोधी अभियानों के कारण माओवादी गतिविधियों में कमी आई है। प्रशासन के अनुसार विकास योजनाओं की ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँच से स्थानीय स्तर पर शासन के प्रति विश्वास में वृद्धि हुई है।

इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक सुकमा किरण चव्हाण ने कहा-21 माओवादी कैडरों का हथियारों सहित आत्मसमर्पण यह स्पष्ट संकेत है कि सुकमा जिले में शांति और विकास की दिशा में निर्णायक बदलाव हो रहा है। लगातार नक्सल विरोधी अभियानों, नए सुरक्षा कैम्पों, सडक़ कनेक्टिविटी और शासन की योजनाओं की पहुँच से माओवादी संगठन का प्रभाव तेजी से कमजोर हुआ है। हम शेष सक्रिय माओवादी कैडरों से अपील करते हैं कि वे हिंसा और विनाश का रास्ता छोडक़र आत्मसमर्पण करें। जिला पुलिस सुकमा उन्हें सुरक्षा, पुनर्वास और सम्मानजनक भविष्य देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
वहीं पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज पी. सुंदरराज ने कहा- 21 माओवादियों का आत्मसमर्पण बस्तर में शांति स्थापना की दिशा में एक बड़ी और महत्वपूर्ण सफलता है। यह इस बात का प्रमाण है कि सुरक्षा बलों की सतत कार्यवाही, विकास की बढ़ती पहुँच और जनता का बढ़ता विश्वास माओवादी संगठन की जड़ों को कमजोर कर रहा है। ‘पूना मारगेम - पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान के माध्यम से हम शेष कैडरों से अपील करते हैं—हिंसा छोड़ें, हथियार छोड़ें और मुख्यधारा में लौटें। शासन उनके सुरक्षित, सम्मानजनक और उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
पुलिस का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को शासन की निर्धारित पुनर्वास नीति के तहत आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।


