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36 सौ करोड़ बकाया
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 3 फरवरी। तेलंगाना सरकार ने छत्तीसगढ़ से बिजली की बकाया राशि पर विवाद सुलझाने के लिए पहल की है। तेलंगाना सरकार की एक टीम जल्द यहां आने वाली है। बताया गया कि छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग ने राज्य पावर कंपनी के आग्रह पर तेलंगाना से बिजली बिल को लेकर विवाद पर सुनवाई की तिथि आगे बढ़ा दी है।
छत्तीसगढ़ नियामक आयोग के एक सदस्य ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि तेलंगाना, और छत्तीसगढ़ पावर कंपनी के बीच बिजली बिल से जुड़े विवाद पर 23 जनवरी को सुनवाई होनी थी, लेकिन पावर कंपनी के आग्रह पर सुनवाई की तिथि आगे बढ़ा दी गई है। प्रकरण पर अब अप्रैल में सुनवाई होगी।
बताया गया कि छत्तीसगढ़ पावर कंपनी ने करीब 36 सौ करोड़ की बिजली बिल वसूली के लिए दबाव बनाया है। तेलंगाना बिजली बिल की राशि देने के सहमत नहीं रहा है। इस पर तेलंगाना से बिजली की बकाया राशि वसूलने पॉवर कंपनी ने अब नियामक आयोग में लगाई याचिका लगाई है।
बताया गया कि छत्तीसगढ़ ने तेलंगाना से बिजली की बकाया राशि वसूलने के लिए पहले हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, और फिर कानूनी परामर्श के बाद वापस लेकर राज्य नियामक आयोग में याचिका दायर की गई।
बताया गया कि तेलंगाना से बिजली आपूर्ति के बाद भुगतान को लेकर पिछले छह साल से विवाद चल रहा था। रमन सिंह सरकार में तेलंगाना के साथ बिजली बेचने को लेकर समझौता हुआ था। जिसमें छत्तीसगढ़ बिजली बोर्ड अलग-अलग समय एक हजार मेगावाट तक बिजली आपूर्ति करती रही है। यह बिजली कोरबा के मड़वा प्लांट से दी जाती रही है। शुरुआत में सब कुछ ठीक चलता रहा। बाद में तेलंगाना बिजली बोर्ड ने बिजली बिल का भुगतान बंद कर दिया।
बताया गया कि बिजली बिल की राशि बढकऱ 36 सौ करोड़ तक पहुंच चुकी है। पिछली सरकार ने भी बिजली बिल के भुगतान के लिए दबाव बनाया गया था। तब छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी, और तेलंगाना के अफसरों के साथ बैठक भी हुई थी। तेलंगाना बिजली की बकाया राशि 21 सौ करोड़ मान रहा है। बकाया भुगतान के लिए किस्तों में राशि देने पर तेलंगाना सरकार ने सहमति दी थी, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद छत्तीसगढ़ पॉवर कंपनी ने बिजली आपूर्ति बंद कर दी।
छत्तीसगढ़ पॉवर कंपनी ने बिजली बिल की वसूली के लिए दबाव बनाया है, और हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उधर, तेलंगाना में सरकार बदलने के बाद कांग्रेस की रेवंत रेड्डी सरकार ने छत्तीसगढ़ पॉवर कंपनी के साथ बिजली खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार पर छत्तीसगढ़ से बिजली खरीदी में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। यह कहा गया कि बिना टेंडर के छत्तीसगढ़ से अधिक दर पर बिजली खरीदी की गई। और इससे तेलंगाना बिजली बोर्ड को 13 सौ करोड़ से अधिक करोड़ का नुकसान हुआ है। तेलंगाना सरकार बकायदा इसकी न्यायिक जांच करा रही है, और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग गठित हुई है। इसकी जांच चल रही है।
दूसरी तरफ, राज्य पॉवर कंपनी की याचिका के बाद तेलंगाना सरकार ने बिजली बिल से जुड़े विवाद का निपटारा करने के लिए पहल की है। इस पूरे मामले पर अधिकारियों के स्तर पर चर्चा चल रही है। जल्द ही तेलंगाना के ऊर्जा मंत्री यहां आने वाले हैं। विवाद नहीं सुलझा, तो आयोग में जल्द सुनवाई के लिए छत्तीसगढ़ पावर कंपनी आवेदन कर सकती है।


