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ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स लेज़र टेक्नोलॉजी की भर्ती, डेका से शिकायत
रायपुर, 2 फरवरी। रविशंकर विश्वविद्यालय, रायपुर के ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स एवं लेज़र टेक्नोलॉजी विभाग में सहायक प्राध्यापक की भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई है। कुलाधिपति रमेन डेका को की गई शिकायत में अभ्यर्थियों की पात्रता से संबंधित गंभीर अनियमितताओं, चयन समिति के गठन में वैधानिक उल्लंघनों तथा आवश्यक अर्हताओं के संबंध में AICTE मानकों के उल्लंघन की जानकारी दी गई है।
ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स एवं लेज़र टेक्नोलॉजी में इनोवेटिव प्रोग्राम (M.Tech.) के अंतर्गत सहायक प्राध्यापक की भर्ती प्रक्रिया के संदर्भ में विश्वविद्यालय द्वारा विज्ञापन 06.09.2023 तथा 03.10.2024 जारी किए गए। विज्ञापन के अनुसार दो पृथक विभाग हैं—(1) इलेक्ट्रॉनिक्स एवं फोटॉनिक्स (क्रमांक 10) तथा (2) इनोवेटिव प्रोग्राम M.Tech. ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स एवं लेज़र टेक्नोलॉजी (क्रमांक 11)। अतः यह स्पष्ट है कि ये दोनों पृथक विभाग हैं तथा चूँकि M.Tech. कार्यक्रम AICTE से अनुमोदित है, इसलिए इस पर AICTE के मानक लागू होंगे।
अपात्र अभ्यर्थियों को लाभ पहुँचाने हेतु पूर्वनियोजित चयन-स्क्रिप्ट
गंभीर चिंता की बात यह है कि संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया को पूर्वनिर्धारित स्क्रिप्ट के तहत संचालित किया गया है, ताकि अपने खास अभ्यर्थियों का चयन किया जा सके, जिनके पास ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स एवं लेज़र टेक्नोलॉजी अथवा फोटॉनिक्स में अनिवार्य M.Tech. अर्हता नहीं है। छत्तीसगढ़ के ऐसे योग्य अभ्यर्थियों की उपलब्धता के बावजूद, जिनके पास संबंधित क्षेत्र में M.Tech. तथा Ph.D. दोनों हैं, विश्वविद्यालय ने अन्य राज्यों से असंगत अर्हताओं वाले अभ्यर्थियों को आमंत्रित कर चयन करने का षड्यंत्र किया है।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी विज्ञापन के विरुद्ध लगभग 35आवेदन आए थे, विश्वविद्यालय ने 7 जनवरी को पात्र और अपात्र अभ्यर्थियों की सूची जारी की जिसमें एमएससी इलेक्ट्रॉनिक्स वाले अभ्यर्थियों को पात्र दर्शाया गया था और एमएससी फिजिक्स वाले अभ्यर्थियों को अपात्र सूची में डाल दिया गया था
अभ्यर्थियों ने जब आपत्ति लगाई , इसकी शिकायत की तो सबको संतुष्ट करने के लिए आपत्तियों का निराकरण करने के नाम पर सभी सभी आवेदनों को पात्र घोषित कर दिया गया और सभी को इंटरव्यू के लिए बुला लिया गया।
अस्थायी रूप से पात्र अभ्यर्थियों की संशोधित सूची के अनुसार अनेक अभ्यर्थियों के पास केवल M.Sc. डिग्री है तथा उनके पास संबंधित क्षेत्र में M.Tech. की अर्हता नहीं है। साथ ही उनकी डिग्री ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स एवं लेज़र टेक्नोलॉजी में भी नहीं है। AICTE मानकों के अनुसार M.Tech. कार्यक्रमों में अध्यापक नियुक्ति हेतु संबंधित विशेषज्ञता में M.Tech./M.E. डिग्री अनिवार्य है। अतः किसी भी मानक व्याख्या के अनुसार ये अभ्यर्थी स्पष्ट रूप से अपात्र हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा हड़बड़ी में की गई इस गंभीर चूक से स्पष्ट है कि विश्विद्यालय प्रशासन किसी चिन्हित अभ्यर्थी के लिए पहले से ही पक्षपाती रही है
आवश्यक अर्हताओं के संबंध में AICTE मानकों का घोर उल्लंघन
ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स एवं लेज़र टेक्नोलॉजी का M.Tech. कार्यक्रम AICTE से अनुमोदित है। AICTE अप्रूवल प्रोसेस हैंडबुक तथा UGC विनियमों के अनुसार यह अनिवार्य है कि M.Tech. कार्यक्रमों हेतु नियुक्त संकाय के पास संबंधित विशेषज्ञता में मास्टर डिग्री (M.Tech./M.E.) हो, अर्थात ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स एवं लेज़र टेक्नोलॉजी अथवा फोटॉनिक्स, या उसी अथवा निकटवर्ती संबद्ध विषय में समकक्ष डिग्री।
यह व्याख्या देश के प्रमुख संस्थानों की स्थापित प्रथा से पूर्णतः स्पष्ट है। कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CUSAT) के इंटरनेशनल स्कूल ऑफ फोटॉनिक्स (ISP) — जो फोटॉनिक्स एवं ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भारत के अग्रणी केंद्रों में से एक है — ने अपने संकाय भर्ती विज्ञापनों में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया है कि अभ्यर्थियों के पास ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स, लेज़र टेक्नोलॉजी, फोटॉनिक्स अथवा निकटवर्ती विशेषज्ञता में M.Tech. होना अनिवार्य है। यह इस विशेष क्षेत्र में संकाय नियुक्ति का मानक प्रतिमान है। (ISP CUSAT का विज्ञापन संलग्न)
इसके बावजूद, अपात्र अर्हताओं वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार हेतु बुलाया गया, जो AICTE मानकों का स्पष्ट उल्लंघन है
केवल M.Sc. इलेक्ट्रॉनिक्स (संबंधित क्षेत्र में M.Tech. नहीं)
M.Sc. फिजिक्स (ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स/लेज़र टेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता नहीं)
माइक्रोवेव इंजीनियरिंग में M.Tech. (असंबद्ध विशेषज्ञता)
डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स, VLSI डिज़ाइन, वायरलेस कम्युनिकेशन में M.Tech. (असंबद्ध क्षेत्र)
सिग्नल प्रोसेसिंग में M.Tech./Ph.D. (पूर्णतः असंबद्ध)
इमेज प्रोसेसिंग में M.Tech./Ph.D. (लेज़र टेक्नोलॉजी से असंबद्ध)
विशिष्ट अपात्र अभ्यर्थियों के चयन हेतु षड्यंत्र
यह तथ्य प्रकाश में आया है कि छत्तीसगढ़ के योग्य अभ्यर्थियों (जिनके पास संबंधित क्षेत्र में M.Tech. एवं Ph.D. है) की उपलब्धता के बावजूद, विश्वविद्यालय ने अन्य राज्यों के ऐसे अभ्यर्थियों को आमंत्रित एवं चयन करने का षड्यंत्र किया है जिनकी अर्हताएँ पूर्णतः असंबद्ध हैं। ऐसे अभ्यर्थियों को M.Tech. ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स के विद्यार्थियों को पढ़ाने हेतु नियुक्त करना शिक्षा की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा तथा विद्यार्थियों के भविष्य को खतरे में डालेगा। यह AICTE मानकों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।
यह अत्यंत गंभीर विषय है कि छत्तीसगढ़ के योग्य, प्रतिभाशाली एवं योग्यताधारी युवाओं को जानबूझकर दरकिनार किया जा रहा है और सिग्नल प्रोसेसिंग, इमेज प्रोसेसिंग जैसे असंबद्ध क्षेत्रों के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जा रही है। यह न केवल AICTE मानकों का उल्लंघन है, बल्कि छत्तीसगढ़ के योग्य युवाओं के साथ घोर अन्याय भी है।
चयन समिति के गठन में वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन
छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 49(2) (पूर्व में म.प्र. विश्वविद्यालय (संशोधन) अधिनियम, 1991) के अनुसार चयन समिति में निम्नलिखित सदस्य होना अनिवार्य है:
(iii) अकादमिक परिषद द्वारा प्रस्तावित तीन विषय-विशेषज्ञों के पैनल में से कुलाधिपति द्वारा नामित एक विशेषज्ञ, जिसका विश्वविद्यालय से किसी भी प्रकार का संबंध न हो।
(iv) कुलाधिपति द्वारा नामित तीन विषय-विशेषज्ञ, जिनका विश्वविद्यालय से किसी भी प्रकार का संबंध न हो।
परंतु वर्तमान प्रकरण में डॉ. संजीव टोकेकर, प्रोफेसर, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET), देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV), इंदौर को चयन समिति का विशेषज्ञ सदस्य बनाया गया, जो निम्न कारणों से विधि के प्रतिकूल है:
(क) विश्वविद्यालय से पूर्व संबंध:
डॉ. टोकेकर वर्ष 2006 से 2010 तक पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रॉनिक्स विषय की शोध उपाधि समिति (RDC) के बाह्य विशेषज्ञ सदस्य रह चुके हैं। अतः वे विश्वविद्यालय से “संबद्ध” रहे हैं, जो वैधानिक प्रावधानों के प्रतिकूल है।
(ख) विषयगत विशेषज्ञता का अभाव:
विज्ञापित पद ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स एवं लेज़र टेक्नोलॉजी का है, जिसके लिए ऑप्टिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, फोटॉनिक्स एवं लेज़र फिजिक्स में विशेषज्ञता आवश्यक है, जबकि डॉ. टोकेकर की विशेषज्ञता कंप्यूटर नेटवर्किंग, कंप्यूटर आर्किटेक्चर एवं कंप्यूटर सिस्टम परफॉर्मेंस में है, जो पूर्णतः असंबद्ध क्षेत्र हैं। अतः वे संबंधित विषय-विशेषज्ञ नहीं हैं और उनकी उपस्थिति से पूरी चयन प्रक्रिया अवैध हो जाती है।
साक्षात्कार नियमों का उल्लंघन
UGC दिशानिर्देशों एवं विश्वविद्यालय अध्यादेशों के अनुसार साक्षात्कार नियमों का कठोरता से पालन अनिवार्य है। प्रतीत होता है कि स्थानीय जांच समिति द्वारा बनाए गए नियमों एवं विश्वविद्यालय के नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया।
उल्लंघित वैधानिक प्रावधान
निम्नलिखित प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है
छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 49(2)(iii) एवं (iv)
AICTE अप्रूवल प्रोसेस हैंडबुक
UGC विनियम, 2018
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 16 एवं 21
अभ्यर्थियों ने विश्विद्यालय प्रशासन और राज भवन से मांग की है कि
(क) 30 जनवरी, 2026 को संपन्न चयन प्रक्रिया को निरस्त करें;
(ख) चयन समिति का पुनर्गठन वैधानिक प्रावधानों के अनुसार कराएं;
(ग) AICTE मानकों के अनुरूप नई विज्ञप्ति जारी करने के निर्देश दें;
(घ) संपूर्ण प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दें;
(ङ) दोषी अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करें;
(च) वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर जांच एजेंसियों को प्रकरण सौंपें।
चूंकि चयन समिति का गठन पूर्णतः अवैध है तथा संपूर्ण चयन प्रक्रिया न्याय के हित में निरस्त की जानी चाहिए तथा पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए


