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सिरपुर की जमीन के भीतर दबे पुरातात्विक अवशेषों की खोज जरूरी-डॉ. ली ची रैन
02-Feb-2026 2:59 PM
सिरपुर की जमीन के भीतर दबे पुरातात्विक अवशेषों की खोज जरूरी-डॉ. ली ची रैन

सिरपुर महोत्सव में पहुंचे विदेशी विशेषज्ञ
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुंद, 2 फरवरी।
सिरपुर में 1 फरवरी से प्रारंभ हुए तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव के अंतर्गत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत पर केंद्रित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर देश-विदेश से इतिहास, कला और संस्कृति से जुड़े विशेषज्ञ सिरपुर पहुंचे हैं।
महोत्सव में दक्षिण कोरिया से आए इतिहास, कला और संस्कृति के विशेषज्ञ प्रो. जंग संगीर, किम डांग ग्वी, डॉ. ली ची रैन और एन नाजियम ने सिरपुर की विरासत, बौद्ध परंपरा और भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में नागपुर से दीक्षा भूमि स्मारक समिति के अध्यक्ष भदंत आर्य नागार्जुन सुरई ससाई, कर्नाटक से भदंत प्रज्ञा बोधि थेरो सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए बौद्ध विद्वान भी उपस्थित रहे।

दक्षिण कोरिया से आए विशेषज्ञों ने ‘छत्तीसगढ़’ से बातचीत के दौरान कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया की संस्कृतियों में पारिवारिक मूल्यों को विशेष महत्व दिया जाता है। माता-पिता और बुजुर्गों के प्रति सम्मान दोनों समाजों में साझा विशेषता है।
प्रो. जंग संगीर ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, जो समानता के अधिकार से संबंधित है, पर लंबे समय से विमर्श होता रहा है। उन्होंने भारत और दक्षिण कोरिया की शासन व्यवस्थाओं तथा आपातकालीन प्रावधानों के संदर्भ में तुलनात्मक अध्ययन की आवश्यकता की बात कही। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2014 में कोरियाई नौसेना के एक जहाज के केरल में रुकने के दौरान भारतीय मेहमाननवाज़ी का अनुभव आज भी याद किया जाता है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच संयुक्त नौसैनिक अभ्यास की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

डॉ. ली ची रैन ने कहा कि सिरपुर एक अंतरराष्ट्रीय महत्व का स्थल है। उनके अनुसार यहां भूमि के भीतर दबे पुरातात्विक अवशेषों की खोज आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि सिरपुर में ऐसे प्रमाण मिल सकते हैं, जो इतिहास के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। उनके अनुसार शांति की खोज में विश्व के बौद्ध भिक्षु सिरपुर आते रहे हैं और दलाई लामा भी यहां आ चुके हैं।
किम डांग ग्वी ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच द्विपक्षीय संबंध निरंतर विकसित हुए हैं और यह संबंध सुरक्षा, व्यापार, निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों तक विस्तृत हैं। उन्होंने कहा कि सिरपुर आगमन भी इसी आपसी सहयोग और सांस्कृतिक संवाद का हिस्सा है। उनके अनुसार सिरपुर बौद्ध परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है और यहां दबी विरासत के संरक्षण व अध्ययन की दिशा में प्रयास जारी हैं।

एन. नाजियम ने सिरपुर की विरासत पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सिरपुर को समझने के लिए विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सिरपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक धरोहर के रूप में देखा जाना चाहिए और इसके संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है।
महोत्सव के दौरान विभिन्न सत्रों में वक्ताओं द्वारा सिरपुर की ऐतिहासिक, बौद्ध और सांस्कृतिक विरासत पर विचार-विमर्श जारी है।


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