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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जांजगीर-चांपा, 30 जनवरी। साल 2008 की उच्चतर माध्यमिक बोर्ड परीक्षा के नतीजों ने प्रदेश भर में हलचल मचा दी थी। बिर्रा विकासखंड के एक निजी विद्यालय की छात्रा पोरा बाई ने 500 में से 484 अंक प्राप्त कर राज्य की मेरिट सूची में पहला स्थान हासिल किया था। इस फर्जीवाड़े में निचली अदालत ने सभी 9 आरोपियों को बरी कर दिया था। अपील के बाद अदालत ने पोराबाई सहित 4 आरोपियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। बाकी 5 को बरी करने का आदेश यथावत रखा गया है।
परिणामों पर उठे सवालों के बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जांच शुरू की थी। तत्कालीन मुख्य सचिव के निर्देश पर हुई फॉरेंसिक और विभागीय जांच में यह सामने आया कि उत्तरपुस्तिकाओं की लिखावट छात्रा की नहीं थी। असली कॉपियां हटाकर जाली उत्तरपुस्तिकाएं रिकॉर्ड में रखी गई थीं।
अदालत में चली सुनवाई के दौरान स्पष्ट हुआ कि यह महज एक छात्रा की व्यक्तिगत धोखाधड़ी नहीं थी। बिर्रा परीक्षा केंद्र पर तत्कालीन प्राचार्य ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए गोपनीयता और परीक्षा व्यवस्था को ताक पर रखा। केंद्र अधीक्षक और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र रचा गया, जिसमें उत्तरपुस्तिकाओं से लेकर केंद्र संचालन तक में व्यापक हेरफेर की गई।
बम्हनीडीह थाना में दर्ज मामले की सुनवाई प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, चांपा में करीब 12 वर्षों तक चली। 24 दिसंबर 2020 को सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। इस निर्णय के विरुद्ध शासन ने जिला न्यायालय में अपील दायर की। अपील पर सुनवाई करते हुए गणेशराम पटेल, द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। पोरा बाई, केंद्र अधीक्षक फूलसाय नरसिंह, प्राचार्य एस.एल. जाटव और दीपक जाटव को आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 व 120बी के तहत दोषी ठहराया गया। चारों दोषियों को प्रत्येक धारा में पांच वर्ष के कठोर कारावास और प्रति धारा 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना न देने पर अतिरिक्त सजा का भी प्रावधान रखा गया है। न्यायालय ने पहले से जेल में बिताई अवधि को सजा में समायोजित करने के निर्देश दिए।
अदालत ने टिप्पणी की कि इस प्रकार के कृत्य न केवल शिक्षा मंडल के साथ धोखा हैं, बल्कि उन मेहनती छात्रों के साथ भी अन्याय हैं, जो ईमानदारी से भविष्य संवारने का सपना देखते हैं। ऐसे मामलों से शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुंचता है।
मामले में गुलाब सिंह बंजारे, बालचंद भारती, समयलाल जाटवर, महेतर लाल साहू और संपतलाल तिवारी को बरी किए जाने का निर्णय बरकरार रखा गया। शासन की ओर से पैरवी लोक अभियोजक संदीप बनाफर ने की।



