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स्वतंत्र एजेंसी को जांच की जिम्मेदारी देने पर भी विचार करने की बात कही
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 30 जनवरी। छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित यस बैंक की सुपेला शाखा में 165 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जिला न्यायालय ने बैंक को पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने का अंतिम अवसर प्रदान करते हुए सख्त रुख अपनाया है। वहीं, आरोपी अनिमेष सिंह ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर पुलिस की कार्यवाही को चुनौती दी है, जिसे मौजूदा आपराधिक प्रकरण के साथ जोड़ दिया गया है। इस घोटाले की जड़ें 2020 तक जाती हैं, जब पहली एफआईआर दर्ज हुई थी, और अब तक की जांच में हवाला लिंक तथा महादेव सट्टेबाजी कांड से संभावित संबंध उजागर हुए हैं।
इस प्रकरण की शुरुआत 2020 में हुई, जब अनिमेष सिंह ने खुरसीपार भिलाई नगर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई। अगले ही दिन रायपुर के सिविल ठेकेदार हितेश चौबे ने काउंटर एफआईआर दाखिल की, जिसके बाद जांच की दिशा बदल गई। अनिमेष सिंह के नाम से खोले गए खाते में कुल 457 बैंक खातों से लेनदेन हुआ, लेकिन बैंक ने अब तक 285 खाताधारकों की जानकारी नहीं सौंपी है। जांच में बैंक की ढिलाई पर अदालत ने नाराजगी जताई और कहा कि यदि पूरी डिटेल नहीं दी गई, तो मामले को स्वतंत्र एजेंसी जैसे सीबीआई को सौंपा जा सकता है।
फरवरी 2025 में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को जांच पूरी करने के लिए दो माह का विस्तार दिया था, साथ ही अप्रैल 2025 तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। याचिकाकर्ता प्रभुनाथ मिश्र ने हवाला नेटवर्क और महादेव बेटिंग घोटाले से कनेक्शन की आशंका जताई थी, जिसके चलते सीबीआई जांच की मांग मजबूत हुई। अदालत ने मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य पुलिस की जांच पर संदेह जताते हुए सीबीआई विकल्प को खुला रखा। जनवरी 2025 में डीजीपी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन जांच की लचरता पर सवाल उठते रहे।
अनिमेष सिंह को जिला अदालत से जमानत मिलने के बाद उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जिसमें पुलिस की कार्यवाही को गलत ठहराया गया। अदालत ने इसे प्रभुनाथ मिश्र के मौजूदा प्रकरण से संलग्न कर दिया। मिश्र के अधिवक्ता सतीश कुमार त्रिपाठी ने कहना है कि अदालत ने कई बार लचर जांच पर नाराजगी व्यक्त की है, और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा होने की उम्मीद है, जिसमें कोई दोषी नहीं बचेगा।


