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रेप के आरोपी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर रद्द करने से हाई कोर्ट इनकार
30-Jan-2026 11:37 AM
रेप के आरोपी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर रद्द करने से हाई कोर्ट इनकार

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 30 जनवरी। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए बलात्कार के आरोपी एक डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर, आरोपपत्र और संज्ञान आदेश को रद्द करने से इंकार कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में प्रारंभिक स्तर पर हस्तक्षेप अत्यंत सीमित और दुर्लभ परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता विजय उमाकांत वाघमारे (33) पेशे से एमएस ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं। वे महाराष्ट्र के लातूर जिले के निवासी हैं। उनके विरुद्ध वर्ष 2018 में दुर्ग जिले के भिलाई नगर थाने में अपराध दर्ज हुआ था। आरोप है कि उन्होंने विवाह का झांसा देकर शिकायतकर्ता के साथ दो बार शारीरिक संबंध बनाए। विवेचना के बाद 3 अक्टूबर 2025 को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत आरोपपत्र पेश किया गया, जिस पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, दुर्ग ने संज्ञान लिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए आरोपी ने दंड प्रक्रिया से संबंधित प्रावधानों के तहत उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।

याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। कथित घटना अवधि में वे पुणे के ससून जनरल अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में तैनात थे और अस्पताल का प्रमाणित उपस्थिति रजिस्टर उनकी निरंतर ड्यूटी को दर्शाता है। मार्च 2017 में भिलाई जाने का आरोप असंभव बताया गया। इसके साथ ही, प्राथमिकी दर्ज होने में 19 माह की देरी, सहमति का प्रश्न और शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा विवाह के लिए दबाव जैसे बिंदुओं को भी रेखांकित किया गया।

राज्य की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए सभी प्रश्न तथ्यात्मक विवाद हैं, जिनका निस्तारण केवल विचारण के दौरान साक्ष्यों के आधार पर ही संभव है। बलात्कार जैसे मामलों में मात्र देरी को प्राथमिकी रद्द करने का आधार नहीं माना जा सकता।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि इस चरण पर साक्ष्यों का मूल्यांकन या ‘मिनी ट्रायल’ नहीं किया जा सकता। एलिबाई, सहमति, देरी और झूठे फंसाए जाने जैसे मुद्दे विचारण का विषय हैं। उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया अपराध का संकेत मिलता है।
इन तथ्यों के आधार पर उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी को विचारण न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

 


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