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नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई है.
उन्होंने चेतावनी दी है कि यह प्रक्रिया 'काफ़ी जल्दबाज़ी में' की जा रही है और इससे लोकतांत्रिक भागीदारी को नुक़सान पहुंच सकता है, ख़ासकर तब जब कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं.
92 वर्षीय अमर्त्य सेन ने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि मतदाता सूची में संशोधन का लोकतंत्र में अहम महत्व होता है, लेकिन यह तभी उपयोगी होता है जब इसे सही परिस्थितियों में किया जाए.
उन्होंने कहा कि इस तरह की कवायद पूरी सावधानी और पर्याप्त समय के साथ होनी चाहिए, जो उनके मुताबिक़ पश्चिम बंगाल के मामले में नहीं दिख रहा है.
अमर्त्य सेन ने कहा, "अगर मतदाता सूची की पूरी तरह समीक्षा सावधानी और पर्याप्त समय के साथ की जाए, तो यह एक अच्छी लोकतांत्रिक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन इस समय पश्चिम बंगाल में ऐसा नहीं हो रहा है."
उन्होंने कहा, "एसआईआर को जल्दबाज़ी में किया जा रहा है और मताधिकार रखने वाले लोगों को आने वाले विधानसभा चुनावों में वोट देने के अपने अधिकार को साबित करने के लिए दस्तावेज़ जमा करने का पर्याप्त मौक़ा नहीं मिल रहा है. यह न सिर्फ़ मतदाताओं के साथ अन्याय है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के लिए भी अनुचित है."(bbc.com/hindi)


