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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 22 जनवरी। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जनजातीय विकास विभाग, रायपुर में पदस्थ सहायक अनुसंधान अधिकारी मीनाक्षी भगत की पदावनति के आदेश पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने शासन और संबंधित विभाग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
याचिका के अनुसार, मीनाक्षी भगत की नियुक्ति वर्ष 2008 में सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर हुई थी। वरिष्ठता सूची में नाम शीर्ष पर होने के कारण विभागीय पदोन्नति समिति ने उन्हें उपयुक्त मानते हुए पदोन्नति की सिफारिश की। इसके आधार पर दिसंबर 2022 में उन्हें सहायक अनुसंधान अधिकारी पद पर पदोन्नत किया गया।
इस पदोन्नति को चुनौती देते हुए विभाग के अन्य कर्मचारियों ने न्यायालय में याचिका दायर की और विभाग में सामूहिक अभ्यावेदन भी दिया। विभागीय जांच में सामने आया कि वर्ष 2016 और 2020 में सहायक अनुसंधान अधिकारी तथा सहायक सांख्यिकी अधिकारी/योजना अधिकारी का संयुक्त कैडर सूची बनाई गई थी।
इसके बाद 11 दिसंबर 2025 को पुनरीक्षित डीपीसी बैठक हुई। इसमें यह कहते हुए कि कैडर में रिक्ति नहीं है, 31 दिसंबर 2025 को मीनाक्षी भगत को पदावनत करने का आदेश जारी कर दिया गया। भगत ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसकी सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि बिना पूर्व सूचना पदावनति प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। दलीलों से सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने पदावनति आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाई और शासन को जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।


