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डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर निकाला, हालत खतरे से बाहर
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
जगदलपुर, 20 जनवरी। सुकमा जिले से एक ग्रामीण को तीर लगने की चोटों के साथ बीती रात मेडिकल कॉलेज अस्पताल डिमरापाल (मेकाज) लाया गया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, घरेलू विवाद के दौरान घायल ग्रामीण पर उसके पुत्र द्वारा तीर चलाए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में आगे की जांच संबंधित प्रशासन द्वारा की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घायल को सुकमा जिले के अस्पताल में प्रारंभिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए मेकाज रेफर किया गया था। चिकित्सकीय जांच में पाया गया कि एक तीर जांघ में और दूसरा कलाई के पास धंसा हुआ था। कलाई के पास लगा तीर हाथ की नस के समीप था, जिससे नर्व को क्षति पहुंचने की आशंका थी।
मेकाज पहुंचने के बाद आर्थोपेडिक्स विभाग की टीम ने रात लगभग 2 बजे उपचार प्रारंभ किया। सहायक प्राध्यापक आर्थोपेडिक्स विभाग डॉ. आदित्य कौशिक ने विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीत पाल के मार्गदर्शन में शल्य प्रक्रिया की। चिकित्सकों के अनुसार, रोगी की स्थिति हेमोडायनामिक रूप से स्थिर थी, हालांकि नस पर दबाव के कारण संभावित नर्व डैमेज का खतरा बना हुआ था।
टीम द्वारा दोनों तीरों को शल्य प्रक्रिया के माध्यम से निकाला गया। कलाई के पास फंसे तीर को निकालते समय विशेष सावधानी बरती गई, ताकि नस को क्षति न पहुंचे। इस दौरान एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. गुलाब सिंह काशी द्वारा आवश्यक एनेस्थीसिया दिया गया।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, ऑपरेशन के बाद घायल व्यक्ति की स्थिति स्थिर है और हाथ की कार्यक्षमता सुरक्षित रहने की संभावना जताई गई है। रोगी को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।





