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-प्रभाकर मणि तिवारी
पश्चिम बंगाल मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (एसआईआर) के विरोध में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन भी ब्लाक डेवलपमेंट आफिसर (बीडीओ) के दफ्तर में तोड़-फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं.
दिनाजपुर जिले के चाकुलिया में स्थानीय लोगों ने रास्ता भी रोका. इस मामले में थाने में एफ़आईआर दर्ज कराई गई है.
पहले दफ्तर में आगजनी की बात कही गई थी. लेकिन पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने दफ्तर के सामने सूखी लकड़ियों में आग लगा कर विरोध जताया. पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि इस घटना की जांच की जा रही है.
इससे पहले बुधवार को मुर्शिदाबाद ज़िले के फरक्का में तृणमूल कांग्रेस विधायक मनीरुल इस्लाम और उनके समर्थकों पर बीडीओ के दफ्तर में तोड़-फोड़ के आरोप लगे थे.
उस हंगामे के बाद मौके पर सुनवाई बंद हो गई. चुनाव आयोग के निर्देश पर इस मामले में एफ़आईआर दर्ज की गई है और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
चाकुलिया के बीडीओ ने शिकायत में कहा है कि सुबह करीब साढ़े नौ बजे करीब तीन सौ लोगों ने जबरन दफ्तर में घुसने का प्रयास किया. मौके पर पहुंची पुलिस की टीम ने उनको रोकने का प्रयास किया. लेकिन भीड़ जबरन भीतर घुस कर तोड़फोड़ करने लगी.
चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी से इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
उधर टीएमसी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी और सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा, "अगर ईसीआई 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' लिस्ट पब्लिश नहीं करता है, तो कोलकाता और दिल्ली में लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन होंगे. बंगाल को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है?"
"बिना प्लानिंग के एसआईआर की वजह से 82 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है और इसके लिए ज्ञानेश कुमार ज़िम्मेदार हैं."
इस बीच भाजपा नेता राजू बिस्ता ने कहा, "एसआईआर इसीलिए हो रहा है कि मतदाता सूची में जो गड़बड़ है उसका संशोधन किया जा सके. मुझे लगता है कि अभिषेक बनर्जी ने अभी तक इसे पढ़ा नहीं है, समझा नहीं है, वे सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी कर रहे हैं." (bbc.com/hindi)


