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वैवाहिक विवाद में पूरे परिवार को घसीटना गलत, हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी के साथ प्रताड़ना का केस रद्द किया
15-Jan-2026 12:07 PM
वैवाहिक विवाद में पूरे परिवार को घसीटना गलत, हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी के साथ प्रताड़ना का केस रद्द किया

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 15 जनवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों में पति के पूरे परिवार को बिना ठोस और विशिष्ट आरोपों के आपराधिक मामलों में फंसाने की प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कानून को उत्पीड़न का औजार नहीं बनने दिया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने पति और उसके परिजनों के खिलाफ दर्ज मामला निरस्त कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें मोहम्मद शाहरुख और उनके परिवार को आरोपी बनाया गया था।

रिकॉर्ड के अनुसार, बिलासपुर निवासी मोहम्मद शाहरुख का विवाह 18 जनवरी 2022 को अंबिकापुर की युवती से मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। आपसी असहमति के चलते 18 दिसंबर 2023 को पति ने पत्नी को उसके मायके छोड़ दिया। इसके लगभग तीन महीने बाद, 19 मार्च 2024 को पत्नी ने महिला थाना और बिलासपुर कलेक्टर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में स्त्रीधन (दहेज) अपने पास रखे जाने का आरोप लगाया गया।

सुनवाई के दौरान एक अहम तथ्य सामने आया। पत्नी के चाचा ने पुलिस को दिए लिखित बयान में स्वीकार किया कि पत्नी को मायके छोड़ते समय पति और उसके परिजनों ने सोने-चांदी के गहने उन्हें सौंप दिए थे, ताकि वे पत्नी के परिवार तक पहुंचाए जा सकें। इस बयान ने स्त्रीधन को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं की।

डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि वैवाहिक मामलों में बिना ठोस और विशिष्ट आरोपों के पति के पूरे परिवार को आरोपी बनाना न्यायसंगत नहीं है। ऐसे मामलों में, जहां आरोप सामान्य और अप्रमाणित हों, उन्हें खारिज किया जाना चाहिए। अदालत ने दोहराया कि कानून का उद्देश्य न्याय है, न कि किसी को दबाव में लेना।
हाईकोर्ट ने सभी पहलुओं पर विचार करते हुए पति और उसके परिजनों के खिलाफ दर्ज आपराधिक केस को रद्द कर दिया।

 


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