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रियल एस्टेट मामलों में रेरा के अधिकार पर हाईकोर्ट ने सीमाएं स्पष्ट की
13-Jan-2026 11:03 AM
रियल एस्टेट मामलों में रेरा के अधिकार पर हाईकोर्ट ने सीमाएं स्पष्ट की

कहा- पहले से जारी नगर निकायों के प्रमाणपत्र पर नहीं हो सकता सवाल

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 13 जनवरी। रियल एस्टेट से जुड़े विवादों में अधिकार क्षेत्र को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कॉलोनी या प्रोजेक्ट के लिए रेरा लागू होने से पहले नगर पंचायत या नगर निगम द्वारा वैध कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया गया है और उसे सक्षम प्राधिकारी ने रद्द नहीं किया है, तो ऐसी स्थिति में रेरा प्राधिकरण या अपीलीय अधिकरण को उस प्रमाणपत्र की वैधता पर विचार करने का अधिकार नहीं है। यह फैसला न्यायमूर्ति रजनी दुबे और न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद की खंडपीठ ने सुनाया।

हाईकोर्ट ने 24 अप्रैल 2024 को पारित रेरा अपीलीय अधिकरण के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि अधिकार क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) से जुड़ी आपत्ति पर प्रारंभिक स्तर पर ही विचार किया जाना जरूरी था।

मामला बिलासपुर जिले के बोदरी स्थित जीवन विहार कॉलोनी से जुड़ा है। कॉलोनी की रेसिडेंट्स वेलफेयर सोसायटी ने रेरा प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कॉलोनी में सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट, बाउंड्रीवाल, गार्डन, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं अधूरी या घटिया गुणवत्ता की हैं।

डेवलपर्स ने जवाब में कहा कि बोदरी नगर पंचायत ने 22 मार्च 2017 को कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया था, जबकि रेरा कानून 1 मई 2017 से लागू हुआ। इसलिए यह प्रोजेक्ट रेरा के दायरे में नहीं आता।
हालांकि रेरा प्राधिकरण ने इस तर्क को खारिज करते हुए जांच के आदेश दिए थे और कलेक्टर को मामले की जांच सौंपने के साथ-साथ कमियों को दूर करने के निर्देश दिए थे।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कम्प्लीशन सर्टिफिकेट नगर निकाय कानून का विषय है। इसकी वैधता की जांच का अधिकार छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 के तहत नामित प्राधिकारी को है, न कि रेरा को।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2018 में जारी प्रमाणपत्र, 2017 के मूल प्रमाणपत्र से जुड़ा स्पष्टीकरण या संशोधन मात्र है। इसे नया प्रमाणपत्र या नई तिथि नहीं माना जा सकता।

हाईकोर्ट ने इस अपील में मुख्य रूप से दो प्रश्नों पर विचार किया। पहला, क्या रेरा प्राधिकरण को कम्प्लीशन सर्टिफिकेट की वैधता जांचने का अधिकार है? दूसरा, क्या इन परिस्थितियों में डेवलपर्स की अपील खारिज की जानी चाहिए थी?

अदालत ने दोनों सवालों का उत्तर डेवलपर्स के पक्ष में दिया और कहा कि ट्रिब्यूनल को अधिकार क्षेत्र से जुड़ी आपत्ति पर पहले निर्णय करना चाहिए था।

हालांकि हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि भविष्य में सक्षम नगर निकाय जांच के बाद इन प्रमाणपत्रों को नियमों के खिलाफ या अवैध पाता है, तो प्रभावित पक्ष दोबारा रेरा का दरवाजा खटखटा सकता है।

 

 

 

 

 

 


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