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धान बेचने के नए नियमों की मार बिचौलियों पर नहीं, छोटे किसानों पर पड़ रही
13-Jan-2026 11:46 AM
धान बेचने के नए नियमों की मार बिचौलियों पर नहीं, छोटे किसानों पर पड़ रही

दफ्तरों के चक्कर लगाकर हार चुका था जहर खाने वाला आदिवासी कृषक सुमेर सिंह, कलेक्टर जनदर्शन में भी नहीं हुई सुनवाई  

सांसद महंत ने सरकार को घेरा, मंत्री देवांगन ने जांच की बात कही

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कोरबा, 13 जनवरी। धान खरीदी व्यवस्था में बदलाव कई किसानों के लिए बोझ बन गया है। जिले में टोकन न मिलने से परेशान एक किसान द्वारा ज़हर पी लेने की घटना ने प्रशासन और सरकार की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर दोषी पटवारी पर त्वरित निलंबन की कार्रवाई हुई, वहीं दूसरी ओर पीड़ित किसान और उसके परिवार की व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की पहल नज़र नहीं आई।

यह घटना हरदीबाजार थाना क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार कोरबी गांव निवासी 40 वर्षीय किसान सुमेर सिंह गोंड ने सोमवार देर रात कीटनाशक पी लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें पहले हरदीबाजार स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से गंभीर स्थिति में मेडिकल कॉलेज अस्पताल, कोरबा रेफर किया गया। डॉक्टरों की कोशिशों से उनकी स्थिति में कुछ सुधार बताया जा रहा है।

सुमेर सिंह के पास लगभग 3 एकड़ 75 डिसमिल भूमि है। इस साल उन्होंने करीब 68 क्विंटल से अधिक धान उपजाया, लेकिन टोकन न मिलने के कारण खरीदी केंद्र पर फसल बेच नहीं पाए। बताया गया कि उनके पास मोबाइल फोन तक नहीं है, जिससे नई प्रक्रिया और सत्यापन की जानकारी जुटाना और मुश्किल हो गया।

परिजनों और गांव के किसानों के मुताबिक सुमेर सिंह करीब डेढ़ महीने तक खरीदी केंद्र, पटवारी कार्यालय और तहसील कार्यालय के चक्कर लगाते रहा। आवेदन दिया, कलेक्टर के जनदर्शन में भी शिकायत दर्ज कराई लेकिन कहीं से समाधान नहीं मिला। लगातार निराशा और आर्थिक दबाव ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया।

किसान की पत्नी मुकुंदी बाई ने बताया कि रविवार रात करीब 12–1 बजे कांच टूटने की आवाज़ आई। दौड़कर पहुंचीं तो पति की हालत बिगड़ी हुई थी। पड़ोसियों की मदद से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे उनकी जान बच सकी।

घटना की सूचना मिलते ही सांसद ज्योत्सना महंत अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने इसे बेहद दुखद बताते हुए कहा कि आदिवासी मुख्यमंत्री वाले राज्य में एक आदिवासी किसान को ज़हर पीने को मजबूर होना पड़ा। यह दिखाता है कि व्यवस्थाएं कागज़ों तक सीमित हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष (ग्रामीण) और अन्य नेताओं ने भी परिवार से मुलाकात कर शासन से जवाब मांगा।

वहीं श्रम मंत्री लखन देवांगन ने जांच टीम गठित करने और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासन ने प्रारंभिक जांच के बाद तिवरता क्षेत्र की पटवारी कामिनी कारे को निलंबित कर दिया। हरदीबाजार के तहसीलदार अभिजीत राजभानु को पर्यवेक्षण में लापरवाही पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।  

मुकुंदी बाई ने बताया कि परिवार में तीन बच्चे हैं। एक बेटी की शादी हो चुकी है, बेटा राजेंद्र और छोटी बेटी रागिनी घर पर रहते हैं। खेती ही एकमात्र सहारा है। इस बार भी सारी बचत खेती में लगाई, जिसकी भरपाई धान बेचकर होनी थी। धान न बिकने की चिंता ने पति को यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। मकान में जगह सीमित होने के कारण 68 क्विंटल धान घर के बाहर रखा है। चोरी और नुकसान की आशंका बनी रहती है, इसलिए पति-पत्नी को रात में भी पहरा देना पड़ता है। लंबे समय तक धान बाहर रखना संभव नहीं, लेकिन टोकन और सत्यापन के बिना बिक्री भी नहीं हो पा रही है।

मालूम हो कि इसके पहले महासमुंद जिले के बागबाहरा में भी टोकन न मिलने से परेशान किसान द्वारा आत्मघाती कदम उठाने की घटना सामने आ चुकी है। इस घटना से मालूम होता है कि सरकार ने अनियमितताओं पर रोक के लिए नियम बदले, लेकिन असर बिचौलियों की जगह किसानों पर पड़ता दिख रहा है। धान खरीदी की अंतिम तिथि नज़दीक है। ऐसे में सर्वे और सत्यापन की लापरवाही के चलते जिन किसानों का धान नहीं बिक पा रहा है वे व्यग्र हो रहे और हताशा की ओर जा रहे हैं और उनमें से कुछ आत्मघाती कदम भी उठा रहे हैं।


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