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गोपनीय रिपोर्ट की अपूर्ण सूचना पर भी अनिवार्य सेवानिवृत्ति वैध: हाईकोर्ट
11-Jan-2026 12:03 PM
गोपनीय रिपोर्ट की अपूर्ण सूचना पर भी अनिवार्य सेवानिवृत्ति वैध: हाईकोर्ट

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 11 जनवरी। कोर्ट कर्मचारी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। अदालत ने कहा कि कर्मचारी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में दर्ज प्रतिकूल टिप्पणियां, भले ही उसे औपचारिक रूप से न बताई गई हों, फिर भी उनके आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर विचार किया जा सकता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने कर्मचारी की याचिका खारिज कर दी।

यह मामला कोर्ट कर्मचारी राजेंद्र कुमार वैद से जुड़ा है, जिन्होंने अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को चुनौती दी थी। याचिका पर सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने की।

अदालत को बताया गया कि राजेंद्र वैद की नियुक्ति वर्ष 1995 में जगदलपुर जिला न्यायालय में प्रोसेस राइटर के पद पर हुई थी। पदोन्नति के बाद वर्ष 2018 में उन्हें बीजापुर न्यायालय में सहायक ग्रेड-2 के रूप में पदस्थ किया गया। 50 वर्ष की आयु या 20 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों की समीक्षा के लिए गठित स्क्रीनिंग कमेटी ने उनकी सेवा पुस्तिका और एसीआर के आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सिफारिश की थी।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि 2011, 2014 और 2016 की गोपनीय रिपोर्ट में की गई प्रतिकूल टिप्पणियां या तो अस्पष्ट थीं या उन्हें कभी सूचित नहीं की गईं। साथ ही, जिला न्यायाधीश द्वारा स्क्रीनिंग कमेटी का गठन कर स्वयं अध्यक्ष और बाद में अनुशासनात्मक प्राधिकारी बनना अनुचित बताया गया।

वहीं, राज्य की ओर से कहा गया कि पूरे सेवा रिकॉर्ड के मूल्यांकन में कर्मचारी के कार्य, आचरण और सत्यनिष्ठा में लगातार गिरावट सामने आई। डिवीजन बेंच ने पाया कि वर्ष 2010 के बाद कर्मचारी के प्रदर्शन में लगातार कमी आई और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की विशेष रिपोर्ट में भी लापरवाही और निर्देशों की अवहेलना का उल्लेख था।

इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने माना कि स्क्रीनिंग कमेटी और अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश पर्याप्त साक्ष्यों पर आधारित है और इसे मनमाना नहीं कहा जा सकता।


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