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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 10 जनवरी। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए चुनाव याचिकाओं से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नाम हटाने की अनुमति दे दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी ने 7 जनवरी को सुनवाई के बाद दिया। मामला चुनाव याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता सरोज चंद्रा और दिगंबर साहू ने विधानसभा चुनाव में जैजैपुर से विजयी उम्मीदवार बालेश्वर साहू के आपराधिक पूर्ववृत्त की जानकारी छिपाने के आधार पर याचिका दायर की थी। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को भी पक्षकार बनाया था, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पार्टियों को भी इसका पालन करना चाहिए।
लेकिन अदालत ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 82 में स्पष्ट रूप से लिखा है कि चुनाव याचिका में किन लोगों को पक्षकार बनाना जरूरी है। इसमें राजनीतिक पार्टियों का नाम शामिल नहीं है।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि भले ही पार्टियों को उम्मीदवारों के क्रिमिनल रिकॉर्ड छिपाने पर सख्ती बरतने के निर्देश हैं और गैर-अनुपालन पर मानहानि का मामला बन सकता है, लेकिन इससे राजनीतिक पार्टी को चुनाव याचिका में आवश्यक पक्षकार नहीं बनाया जा सकता।
इसलिए कोर्ट ने कांग्रेस पार्टी का नाम याचिका से हटाने की अर्जी मंजूर कर ली। याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के अंदर याचिका में जरूरी संशोधन करके नाम हटाने के निर्देश दिए गए हैं। कांग्रेस कमेटी की ओर से अधिवक्ता संदीप दुबे ने पैरवी की।
अब मामला केवल विजयी उम्मीदवार जैजैपुर के विधायक बालेश्वर साहू के खिलाफ ही चलेगा। अगली सुनवाई 20 जनवरी 2026 को होगी।
इससे पहले चुनाव आयोग और कांग्रेस विधायक बालेश्वर साहू को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। मतदाता सरोज चंद्रा और दिगंबर साहू ने हाईकोर्ट में अलग-अलग दो याचिका दायर की है। एडवोकेट टीके झा के माध्यम से दायर याचिका में चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को आधार बनाया गया था। याचिका में बताया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आयोग ने एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों को अपने आपराधिक रिकार्ड की जानकारी मीडिया के अलावा सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म में शेयर करना जरूरी है। कांग्रेस प्रत्याशी और निर्वाचित विधायक बालेश्वर साहू ने नामांकन पत्र में शपथ पत्र दिया है और मीडिया में इसे जारी भी किया है। लेकिन, सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी शेयर नहीं किया है, जो चुनाव आयोग के आदेशों का उल्लंघन है। याचिका में विधायक बालेश्वर साहू के निर्वाचन को शून्य घोषित करने की मांग की गई है।


