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-इमरान क़ुरैशी
कर्नाटक के बागलकोट में विकलांग बच्चों के एक बोर्डिंग स्कूल के चार लोगों को स्कूल के विद्यार्थियों को बेल्ट से पीटने के आरोप में पुलिस ने गिरफ़्तार किया है.
गिरफ़्तार किए चार लोगों में35 साल के अक्षय, 31 साल की आनंदी और स्कूल के दो शिक्षक शामिल हैं. अक्षय और आनंदी के नाम पर रिजस्टर्ड एनजीओं के द्वारा स्कूल का संचालन किया जा रहा था.
पुलिस को अभिभावकों की ओर से दिए गए वीडियो में बच्चों को बेल्ट से पीटते देखा जा सकता है, जिसमें बच्चे दर्द से चिल्ला रहे हैं. बताया जा रहा है कि बच्चों के परिवार वालों को यह वीडियो स्कूल के पूर्व कर्मचारियों ने दिया. इन कर्मचारियों को हाल ही में स्कूल से निकाल दिया गया था.
बागलकोट के एसपी सिद्धार्थ गोयल ने बताया कि बच्चों का यह वीडियो कर्मचारियों की ओर से तीन महीने पहले रिकॉर्ड किया गया था.
एसपी गोयल ने पत्रकारों को बताया, "बोर्डिंग एनजीओ के मालिक दंपति की ओर से काम से निकाले जाने के बाद कर्मचारियों ने यह वीडियो बच्चों के माता-पिता को दिए."
एसपी ने बीबीसी हिन्दी को बताया, "इस स्कूल में सामान्य रूप से 30-35 बच्चे रहते हैं. जब हम वहां गए तो वहां करीब 30 बच्चे थे. हमने एनजीओ के मालिक दंपति और दो अन्य शिक्षकों को गिरफ्तार कर लिया है."
पुलिस ने एससी-एसटी एक्ट के तहत मारपीट का मामला दर्ज किया है. जिसके अंतर्गत छह महीने से लेकर पांच साल तक की सज़ा का प्रावधान है.
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 40, धारा 75 और धारा 82 के तहत भी केस दर्ज किया गया है.
धारा 40 के तहत स्कूल में रहने के दौरान बच्चों की सुरक्षा के लिए नियम बताए गए हैं.
धारा 75 में बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार के लिए प्रावधान हैं, जिसमें दोषियों के लिए तीन साल की सज़ा या एक लाख रुपये का जुर्माना या दोनों शामिल हैं.
धारा 82 में किसी भी बाल देखभाल संस्था के प्रभारी या कर्मचारी द्वारा अनुशासन के नाम पर शारीरिक दंड देने पर तीन वर्ष की कारावास और/या 10,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है. (bbc.com/hindi)


