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छत्तीसगढ़' संवाददाता
रायपुर, 15 दिसंबर । स्कूली शिक्षकों से आवारा पशुओं कुत्तों की धरपकड़ अभियान को लेकर मचा बवाल अभी शांत नहीं हुआ था और अब उच्च शिक्षा विभाग ने ऐसा करने सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को पत्र लिखा है। पत्र में आवारा कुत्तों के स्थान पर आवारा पशुओं का उल्लेख किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश पर आयुक्त उच्च शिक्षा ने सभी शासकीय अशासकीय निजी विश्वविद्यालय-महाविद्यालयों के कुलसचिव, प्राचार्यों से इस कार्य के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने कहा है। नोडल अधिकारी प्रोफेसर या सहायक प्राध्यापकों को नियुक्त किया जाएगा। जो नगर निगम, पालिका परिषद के अफसरों से संपर्क में रहकर कार्रवाई को आगे बढ़ाएंगे। इसके लिए उच्च शिक्षा संचालनालय में डा जलजा नायर को प्रदेश नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
इस पत्र में कहा गया है कि 8 दिसंबर को मंत्रालय में हुई बैठक में यह तय किया गया है।
सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाना एवं डिस्प्ले बोर्ड में समस्त जानकारियों तथा हेल्पलाईन नंबर का प्रदर्शन कर फोटोग्राफ को नोडल अधिकारी डॉ. टी. जलजा नायर, उच्च शिक्षा संचालनालय को दूरभाष कमांक 9977123834 में व्हाट्स अप के माध्यम से उपलब्ध करना होगा
संस्थाओं में नियुक्त नोडल अधिकारियों को स्थानीय प्रशासन एवं नगर पालिका/परिषदों से सतत् संपर्क एवं सामंजस्य बनाये रखेंगे ।
संस्था परिसर के भीतर अथवा बाहर पागल कुत्तों के देखे जाने पर इन्हें हटाने हेतु स्थानीय प्रशासन एवं नगर पालिका/परिषद से संपर्क कर यथाशीघ्र इन्हें हटाया जाए। इन कुत्तों के आने का कारण बनने वाले कोई खाद्य सामग्री खुले में न रखे जिससे आवारा पशुओं का प्रवेश संस्था में न हो सके।
प्रत्येक संस्था में फर्स्ट एड बॉक्स की व्यवस्था की जाएगी।परिसर में आवारा पशुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित व नियंत्रित करते हुए इस हेतु नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाएगी आवारा पशुओं के प्रवेश को नियंत्रित करने एवं इनसे बचाव के लिए उचित जागरूकता कार्यक्रम संचालित कर विद्यार्थियों एवं स्टाफ को जागरूक करना सुनिश्चित करें।
इसी तरह से संस्थाओं के परिसर को चार दिवारी का निर्माण किया जाए।सभी शिक्षण संस्थान में इस संबंध में पशु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से संपर्क कर वर्कशॉप आयोजित करें ताकि छात्रों और स्टॉफ को इस संबंध में जागरुक किया जा सके।किसी भी प्रकार के सहयोग एवं सहायता हेतु हेल्प लाईन नंबर 1100 को प्रचारित व प्रसारित करना सुनिश्चित करें।


