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हाईकोर्ट ने किराया नियंत्रण प्राधिकरण का आदेश किया बहाल
15-Dec-2025 10:36 AM
हाईकोर्ट ने किराया नियंत्रण प्राधिकरण का आदेश किया बहाल

चार सप्ताह में बकाया किराया जमा नहीं किया तो होगी बेदखली

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 15 दिसंबर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की खंडपीठ जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने एक संपत्ति विवाद में किराया नियंत्रण प्राधिकरण के आदेश को बहाल कर दिया है।

हाईकोर्ट ने किरायेदार को चार सप्ताह के भीतर संपूर्ण बकाया किराया जमा करने का अंतिम अवसर दिया है। यदि तय समय-सीमा में किराया जमा नहीं किया गया, तो किरायेदार का अवसर स्वतः समाप्त हो जाएगा और बेदखली की कार्रवाई शुरू की जा सकेगी। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि किराया जमा न होने की स्थिति में किराया नियंत्रण प्राधिकरण दो माह के भीतर बेदखली और किराया वसूली से जुड़ी समस्त कानूनी प्रक्रिया पूरी करे। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ किराया नियंत्रण अधिनियम, 2016 के नियम-7 के तहत की जाएगी।

यह मामला गायत्री देवी अग्रवाल एवं अन्य बनाम निर्मला देवी सिंघानिया एवं अन्य से संबंधित है। विवाद ग्राम बैकुंठपुर, तहसील व जिला रायगढ़ स्थित खसरा नंबर 141/1/1, रकबा 0.541 हेक्टेयर की भूमि तथा गोपाल सिंघानिया की लकड़ी टाल, कोतरा रोड से जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट ने 27 नवंबर 2025 को दिए गए आदेश में रायगढ़ किराया नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा 25 मार्च 2022 को पारित मूल आदेश को सही ठहराया। इससे पहले रायपुर स्थित किराया न्यायाधिकरण ने अपील में 20 दिसंबर 2022 को उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसे अब हाईकोर्ट ने पलट दिया है।


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