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सरकार ने बताया डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स पर ग़लत जानकारी रोकने को लेकर क्या हैं नियम
13-Dec-2025 9:24 AM
सरकार ने बताया डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स पर ग़लत जानकारी रोकने को लेकर क्या हैं नियम

भारत सरकार ने शुक्रवार को कहा कि इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 लोगों को अधिक सक्षम बनाते हैं.

सरकार के मुताबिक़ ये डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फर्ज़ी, ग़लत और भ्रामक सामग्री को रोकने को लेकर कड़ी ज़िम्मेदारी तय करते हैं.

यह स्पष्टीकरण राज्यसभा में सूचना प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉक्टर एल मुरुगन ने दी.

मंत्री ने कहा कि जहां एक ओर संविधान का अनुच्छेद 19 (1) अभिव्यक्ति की आज़ादी देता है, तो वहीं दूसरी ओर डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स पर बढ़ती ग़लत जानकारी की समस्या को देखते हुए रेग्युलेटरी एक्शन्स की ज़रूरत महसूस की गई है.

पीआईबी के प्रेस रिलीज़ के मुताबिक़, साल 2000 के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत 25 फरवरी 2021 को अधिसूचित आईटी नियमों में सोशल मीडिया मध्यस्थों की ज़िम्मेदारियों को स्पष्ट किया गया है.

फे़सबुक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर आईटी नियमों के पार्ट-II के तहत यह स्पष्ट प्रावधान है कि वे ग़लत, भ्रामक या फर्ज़ी जानकारी के प्रसार को रोकेंगे.

प्लेटफ़ॉर्म्स को ऐसी सामग्री पर कार्रवाई करनी होगी और उपयोगकर्ताओं के लिए शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था भी उपलब्ध करानी होगी.

सरकार ने पीआईबी के फ़ैक्ट चेक यूनिट की भूमिका का भी ज़िक्र किया है, जिसे नवंबर 2019 में केंद्र सरकार से संबंधित फर्ज़ी ख़बरों की पहचान और सत्यापन के लिए बनाया था.

यह यूनिट संबंधित मंत्रालयों और विभागों से जानकारी की पुष्टि करने के बाद अपने आधिकारिक सोशल मीडिया चैनलों पर प्रकाशित या प्रसारित फ़ैक्ट्स के संबंध में जानकारी देता है कि यह सही है या ग़लत.

इसके लिए सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत उन वेबसाइटों, सोशल मीडिया अकाउंट्स या पोस्ट्स को ब्लॉक करने के अधिकार का इस्तेमाल करती है जो भारत की संप्रभुता और अखंडता, रक्षा, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए ख़तरा पैदा करते हैं.

डॉक्टर मुरुगन ने यह जानकारी राज्यसभा में डॉक्टर लक्ष्मीकांत बाजपेयी के एक सवाल के जवाब में दी.

लक्ष्मीकांत बाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. (bbc.com/hindi)


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