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अमेरा ओपनकास्ट कोल खदान विस्तार : जमीन बचाने पारंपरिक हथियारों का सहारा
03-Dec-2025 6:58 PM
अमेरा ओपनकास्ट कोल खदान विस्तार :  जमीन बचाने पारंपरिक हथियारों का सहारा

पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों ने पत्थरबाजी का लगाया आरोप, दर्जनों जख्मी,  तनाव

 ‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

लखनपुर, 3 नवंबर। अमेरा ओपनकास्ट कोल माइंस के विस्तार को लेकर बुधवार को लखनपुर क्षेत्र में पुलिस बल और ग्रामीणों के बीच टकराव हुआ। इस दौरान दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए। पुलिस ने बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, एसईसीएल की अमेरा खदान के विस्तार के लिए परसोड़़ी गांव की भूमि वर्ष 2001 में अर्जित किए जाने का उल्लेख प्रशासन द्वारा किया गया है। खदान संचालन के लिए प्रशासनिक टीम और करीब 500 पुलिसकर्मी जमीन पर कार्रवाई के लिए पहुंचे। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच संघर्ष हो गया।

ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों पर लाठी- डंडे पत्थर, गुलेल से हमला कर दिया। बचाव में पुलिसकर्मियों ने भी ग्रामीणों पर पत्थर चलाए।  पुलिस और ग्रामीणों ने एक-दूसरे पर पहले पत्थर चलाने का आरोप लगाया है। पत्थरबाजी और लाठी प्रहार में एएसपी अमोलक सिंह, एसडीओपी (ग्रामीण), धौरपुर थाना प्रभारी अश्वनी सिंह सहित लगभग 30 पुलिसकर्मियों को चोटें आने की पुष्टि पुलिस ने की है।

थाना प्रभारी अश्वनी सिंह को अंबिकापुर भेजा गया है। ग्रामीणों की ओर से भी 15 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है।

शाम तक टकराव की स्थिति बनी रही। पुलिस ने भीड़ को हटाने और स्थिति नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।

जमीन देने के लिए तैयार नहीं -ग्रामीण

परसोड़़ी गांव के ग्रामीणों ने कहा कि भूमि अर्जन के बाद भी कई किसानों को अब तक पूर्ण मुआवजा या रोजगार नहीं मिला है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ माह पहले अधिग्रहित जमीन पर मशीनरी चलाई गई थी, जिसके बाद से वे खेतों पर बने हुए हैं। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि वे अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं और विस्तार का विरोध जारी रखेंगे।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें भूमि पर कब्जा सौंपने के लिए मजबूर कर रहा है। उनका कहना है कि भूमि उनके पूर्वजों की है और वे खनन गतिविधियों के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराना चाहते।

निजी कंपनी संचालित कर रही है खदान

एसईसीएल द्वारा खदान संचालन का काम एलसीसी कंपनी को दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी अधिकारियों की सहायता से भूमि पर कब्जा लेने का प्रयास किया जा रहा है। इस पर कंपनी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई है।

अपर कलेक्टर सुनील नायक ने बताया कि भूमि अर्जन की कार्रवाई वर्ष 2016 में पूरी की गई थी और कुछ ग्रामीण मुआवजा स्वीकार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोयला खनन के लिए एसईसीएल को अनुमति दिए जाने के संबंध में ग्रामीणों से बातचीत की जा रही है।

अपर कलेक्टर ने कहा कि पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और कुछ का मौके पर उपचार किया गया। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों से दोबारा चर्चा कर उत्खनन कार्य में सहयोग का अनुरोध किया गया है।


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