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-आलोक प्रकाश पुतुल
हिंदी के शीर्ष कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल को आज हिंदी के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
यह पुरस्कार उन्हें उनके रायपुर स्थित निवास पर दिया गया. इस मौके पर उन्होंने अपने पाठकों, समकालीन लेखकों और नई पीढ़ी के प्रति आभार व्यक्त किया.
उन्होंने कहा, "जब हिन्दी भाषा सहित दूसरी भाषाओं पर संकट की बात कही जा रही है, तो मुझे पूरी उम्मीद है नई पीढ़ी हर भाषा का सम्मान करेगी. हर विचारधारा का सम्मान करेगी. किसी भाषा या अच्छे विचार का नष्ट होना, मनुष्यता का नष्ट होना है."
पिछले कई वर्षों से विनोद कुमार शुक्ल बच्चों और किशोरों के लिए भी लिखते रहे हैं.
ज्ञानपीठ सम्मान समारोह के दौरान उन्होंने अपनी एक प्रसिद्ध कविता 'सबके साथ हो गया हूं' का पाठ भी किया. उनका पहला कविता-संग्रह ‘लगभग जय हिन्द’ 1971 में प्रकाशित हुआ था.
अब तक मिले सम्मान
अपने लंबे रचनात्मक सफ़र में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, गजानन माधव मुक्तिबोध फ़ेलोशिप, रज़ा पुरस्कार, शिखर सम्मान, राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान, हिंदी गौरव सम्मान, मातृभूमि पुरस्कार, साहित्य अकादमी का महत्तर सदस्य सम्मान और 2023 का पेन-नाबोकोव पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. (bbc.com/hindi)


