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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 11 नवंबर। सीपत क्षेत्र के बिटकुला गांव में किसान से रिश्वत मांगने वाले नायब तहसीलदार को एंटी करप्शन ब्यूरो ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। नायब तहसीलदार देशकुमार कुर्रे ने जमीन के नामांतरण और रिकॉर्ड दुरुस्ती के लिए किसान से डेढ़ लाख रुपये की मांग की थी। किसान ने रुपये देने के बजाय साहस दिखाते हुए सीधे एसीबी में शिकायत दर्ज कराई।
बिटकुला निवासी किसान प्रवीण पाटनवार ने शिकायत दी थी कि उसकी मां के निधन के बाद 21 एकड़ जमीन को भाई-बहनों के नाम दर्ज कराने के लिए उसने आवेदन दिया था।
नायब तहसीलदार देशकुमार कुर्रे बार-बार उसे टालता रहा और अंत में 1.50 लाख रुपये की रिश्वत मांगी । बाद में सौदा 1.20 लाख रुपये में फाइनल हुआ।
एसीबी के डीएसपी अजितेश सिंह ने बताया कि जांच में शिकायत सही पाई गई, जिसके बाद टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। किसान पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये लेकर पहुंचा तो नायब तहसीलदार ने उसे कार्यालय के बजाय एनटीपीसी के कॉफी हाउस बुलाया।
जैसे ही किसान ने रुपये सौंपे, एसीबी की टीम ने मौके पर ही उसे दबोच लिया। गवाहों की मौजूदगी में रुपये बरामद किए गए और आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया।
इधर, नायब तहसीलदार की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही सीपत तहसील कार्यालय में हड़कंप मच गया। कई बाबू और कर्मचारी कार्यालय छोड़कर भाग निकले, जबकि कुछ लोग दस्तावेजों को इधर-उधर करने में जुट गए। ग्रामीणों ने बताया कि तहसील कार्यालय में लंबे समय से दलाल सक्रिय हैं, जो छोटे-बड़े कामों के लिए बिचौलिया बनकर रिश्वत वसूलते हैं। यह आम शिकायत है कि तहसील में नामांतरण, फौती और नक्शा दुरुस्ती जैसे कामों के लिए महीनों तक चक्कर काटने पड़ते हैं और अक्सर सुविधा शुल्क मांगा जाता है।
एसीबी ने गवाहों की मौजूदगी में कार्रवाई पूरी की और आरोपी नायब तहसीलदार को कोर्ट में पेश किया गया।


