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पर्यावरण के प्रति ऐसा प्रेम की बरगद को जिंदा रखना चाहती है बाम्हनसरा की 5वीं पीढ़ी
संदीप सिन्हा
रायपुर, 5 जून (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। महासमुंद जिले के बागबाहरा ब्लॉक से 25 किलोमीटर दूर बाम्हनसरा गांव के ग्रामीणों ने पर्यावरण के प्रति ऐसा प्रेम की बरगद पेड़, जिसे सुरक्षित रखने का कार्य कर रहे है। यह पेड़ 44 हजार वर्गफीट में पैला है। इसकी उम्र 495 साल से अधिक बताई जा रही है। कोमाखान के तात्कालीन जमींदार बुंदी शाह ने पूर्वजों ने 1524 में बस्तर से लाकर इसे रोपा था। अब पेड़ की सुरक्षा में गांव की पांचवीं पीढ़ी भी लगी है। सुरक्षा के लिए यहां का हर शख्स बरगढ़ के साथ अपना रिश्ता बनाए हुए है। गांव के लोग भाई, चाचा और दादा बरगद के रूप में संबोधित करते है। पेड़ और ग्रामीणों के रिश्तों की कड़ी क्षेत्र में इसकी खासियत और आकर्षण को बढ़ाया है।
कैंपा फंड के जरिए किया जा रहा इस पेड़ा का संरक्षण
इसलिए बचाने में जुटे- इस उम्र में भी पेड़ ग्रामीणों को गर्मी से बचा रहा है। पेड़ के नीचे 25-30 के बीच तापमान होता है। इसलिए बच्चों को लेकर गांव के लोग वहां चले आते है।
ऐसे तैयार हुए रिश्ते- बीस साल पहले कुछ लोग पेड़ काटना चाह रहे थे। ग्रीन केयर सोसायटी के अध्यक्ष विश्वनाथ पाणिग्रही ने पूर्वजों के साथ जुड़ाव को बताया तो लोगों ने पूर्वज मान रिश्ते जोड़ दिए।
पनपी 25 प्रजातियां- पेड़ों के जानकारों का कहना है कि यहां मिथक टूटा है जिसमें कहते है बरगढ़ के नीचे कोई दूसरा पेड़ नहीं पनपता। यहां 25 प्रजाति के दूसरे पौधे पनप कर पेड़ बन रहे है।




