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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड) पर क़ानून बनाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने का एलान शुक्रवार को किया है.
पांच सदस्यों वाली इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी. वो अभी जम्मू और कश्मीर परिसीमन आयोग की अध्यक्ष भी हैं. समिति के अन्य सदस्यों में रिटायर्ड जज जस्टिस प्रमोद कोहली, समाजसेवी मनोज गौर, रिटायर्ड आईएएस शत्रुघ्न सिंह और दून यूनिवर्सिटी, देहरादून की कुलपति सुरेखा डंगवाल होंगी.
अंग्रेज़ी दैनिक 'द हिंदू' के अनुसार, यह समिति इस क़ानून को लागू करने के तरीक़े की जांच करने के साथ विवाह, तलाक़, गुज़ारा-भत्ता, गोद लेने, संपत्ति का हस्तांतरण और अन्य पर्सनल क़ानूनों की जांच करेगी.
राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया है कि यह समिति सभी समुदायों के पर्सनल क़ानूनों और उनके मसलों की जांच करके एक यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाएगी.
हालांकि इस समिति के कार्यकाल के बारे में जारी अधिसूचना में कुछ नहीं बताया गया है. अख़बार के अनुसार, राज्य में इस क़ानून को लागू करने की कोई पुरज़ोर मांग नहीं है, फिर भी सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है.
इससे पहले फरवरी में चुनाव के ऐन पहले सीएम धामी ने एलान किया था कि यदि वो फिर से चुनकर आए तो राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की पूरी कोशिश करेंगे. यहां तक कि मार्च में शपथ लेने के बाद उन्होंने जब दोबारा सीएम का कार्यभार संभाला तो कैबिनेट की पहली बैठक में ही समिति बनाने के प्रस्ताव को पारित किया गया था.
वैसे देश में अभी तक समान नागरिक संहिता लागू करने वाला एकमात्र राज्य गोवा है, लेकिन वहां यह क़ानून आज़ादी के भी बहुत पहले 1870 के दशक से लागू है. (bbc.com)


