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देश के कई हिस्सों में लोगों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है. कई राज्यों के अधिकारी और यहां तक कि मुख्यमंत्री भी बिजली कटौती और कोयले की किल्लत पर अपनी चिंता ज़ाहिर कर चुके हैं.
इसी क्रम में राहुल गांधी ने भी ट्वीट करके पीएम मोदी से सवाल पूछा है.
उन्होंने ट्वीट किया- “प्रधानमंत्री जी के ‘वादों’ और ‘इरादों’ के बीच का तार तो हमेशा से ही कटा था.मोदी जी, इस बिजली संकट में आप अपनी नाकामी के लिए किसे दोष देंगे? नेहरू जी को? राज्य सरकारों को? या फिर जनता को ही?”
इससे एक दिन पहले पी चिदंबरम ने भी ट्वीट करके मोदी और मोदी सरकार पर निशाना साधा था.
उन्होंने ट्वीट किया था- “प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कोयला, विशाल रेल नेटवर्क, थर्मल प्लांट्स की क्षमता जिसका पूरा इस्तेमाल भी नहीं हो रहा...फिर भी बिजली की भारी कमी है. मोदी सरकार को दोष नहीं दिया जा सकता है. यह कांग्रेस के 60 सालों के शासन के कारण है.”
उन्होंने आगे ट्वीट किया था- “कोयला मंत्रालय, रेलवे मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय, वहां कोई कमी नहीं है. सारा का सारा दोष इन मंत्रालयों के पूर्व कांग्रेसी मंत्रियो का है.”
पी चिदंबरम ने इस मामले पर अपने आख़िरी ट्वीट में लिखा- मोदी है तो मुमकिन है.
देश के कई हिस्सों में बिजली उत्पादन संयंत्र कोयला संकट का सामना कर रहे हैं. रेलवे ने इससे निपटने के लिए और कोयले की आपूर्ति के लिए कई पैसेंजर ट्रेनों को रद्द कर दिया है, ताकि कोयला ले जा रही माल गाड़ियों के फेरों को बढ़ाया जा सके.
इससे एक दिन पहले दिल्ली सरकार में मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा था कि देश में कोयले की कमी है, हमारे पास 21 दिन का कोयले का बैकअप होना चाहिए लेकिन बहुत से पावर प्लांट्स के पास सिर्फ़ एक दिन का ही कोयला बचा है. (bbc.com)


