ताजा खबर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 28 अप्रैल। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेडी टू ईट आहार पर लिए गए सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए स्व-सहायता समूहों की याचिका को खारिज कर दिया है।
राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रो में आईसीडीएस योजना के तहत महिलाओं और बच्चों को दिए जाने वाले पौष्टिक आहार रेडी टू ईट का निर्माण राज्य कृषि बीज विकास निगम द्वारा अनुबंधित कंपनी से कराने का निर्णय लिया था। इसे अब तक छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से तैयार कराया और वितरित किया जाता था। शासन के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में महिला स्व-सहायता समूहों की ओर से 287 याचिकाएं दायर की गई थीं। जस्टिस आरसीएस सामंत की बेंच ने इस मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद आज शासन के पक्ष में निर्णय देते हुए सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
महिला स्व सहायता समूहों की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने दलील दी थी कि स्व-सहायता समूह अनेक वर्षों से रेडी टू ईट तैयार कर रही हैं। शासन के इस फैसले से 20 हजार से अधिक महिलाओं का रोजगार समाप्त हो जाएगा। उनके बनाये गए रेडी टू ईट की गुणवत्ता पर कोई शिकायत नहीं की गई है अतएव इस आधार पर उनसे काम छीना जाना सही नहीं है। महिला स्व सहायता समूहों ने महिला बाल विकास विभाग से 3 वर्ष का अनुबंध किया है, जिसकी अवधि भी अभी बाकी है। रेडी टू ईट आहार तैयार करने के लिए उन्होंने बैंकों से कर्ज भी लिया है। इस फैसले से वे कर्ज नहीं चुका पाएंगे।
सरकार की ओर से महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने दलील दी कि यह फैसला केबिनेट ने बीते वर्ष 26 नवंबर को लिया था। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए आहार की आपूर्ति और गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था की गई है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि स्व-सहायता समूहों को इस योजना से पूरी तरह बाहर नहीं किया गया है। आहार के परिवहन और वितरण का काम उनके पास रहेगा। सरकार की अधिसूचना खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों के अधीन ही लिया गया है। पूरी प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के किसी निर्णय का विरोधाभास नहीं है और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई है।


