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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमारा प्रदेश शांत रहना चाहिए. हमारे प्रदेश की धर्म-संस्कृति बची रहनी चाहिए. इसको लेकर सरकार अपने स्तर से अभियान चलाएगी. हम कोशिश करेंगे कि जिन लोगों के वेरिफिकेशन ठीक तरह से नहीं हुए हैं, उनके वेरिफिकेशन हों. उत्तराखंड में ऐसे व्यक्ति न आएं जिनके कारण यहां स्थिति खराब हो”.
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार के संज्ञान में यह विषय है और इस पर नियम के तहत जरूरी कार्रवाई की जाएगी.
दिसंबर-2021 में हरिद्वार धर्म संसद में समुदाय विशेष के विरोध में बोलने वाले स्वामी आनंद स्वरूप ने राज्य के चारों धाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग की थी. हरिद्वार का संत समाज इस मांग का समर्थन कर रहा है. 3 मई को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा शुरू हो जाएगी. धामी भी इससे पहले उत्तराखंड में जनसांख्यिकीय बदलाव का मुद्दा उठा चुके हैं.
मार्च में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भी अपनी प्राथमिकता गिनाते हुए, उन्होंने कहा “प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लेकर एक ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा. इसके लिए जल्द कमेटी गठित की जाएगी”. चारधाम यात्रा में गैर-हिंदुओं के प्रवेश के मामले को भी राज्य में आबादी के स्वरूप में बदलाव के उनके बयान से जोड़कर देखा जा रहा है.
राज्य में बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय कहते हैं कि संत गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग पहले से कर रहे थे. वह कहते हैं “मैं खुद भी राज्य में जनसांख्यिकीय बदलाव का मुद्दा उठा चुका हूं. हमारा राज्य पौराणिक मान्यताओं वाला है और देवभूमि के तौर पर जाना जाता है. दो-दो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ा क्षेत्र होने की वजह से भी यहां अलग से प्रावधान होने चाहिए. मुख्यमंत्री का बयान स्वागत योग्य है”.
अजेंद्र बताते हैं कि चारों धाम में दर्शन करने आऩे वाले यात्रियों का बीकेटीसी किसी तरह का रजिस्ट्रेशन नहीं करती है. हालांकि उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद चारधाम यात्रा के लिए आने वाले यात्रियों का ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन की व्यवस्था कर रही है.
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए वेब-पोर्टल की व्यवस्था की गई है. इसके साथ ही यात्रा मार्ग के विभिन्न पड़ाव हरिद्वार, ऋषिकेश, बड़कोट, जानकीचट्टी, हीना, उत्तरकाशी, सोनप्रयाग, जोशीमठ, गौरीकुंड, गोविंद घाट और पाखी में फिजिकल रजिस्ट्रेशन सेंटर बनाए गए हैं. चारों धाम और श्री हेमकुंट साहिब में यात्रा पर आने वाले लोगों के लिए सत्यापन केंद्र भी बनाए गए हैं. (bbc.com)


