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तीन साल में छत्तीसगढ़ में नक्सल घटनाओं में कमी आई है- भूपेश
19-Apr-2022 5:00 PM
तीन साल में छत्तीसगढ़ में नक्सल घटनाओं में कमी आई है- भूपेश

  जनजातीय साहित्य महोत्सव का उद्घाटन  
छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 19 अप्रैल।
राष्ट्रीय आदिवासी साहित्य समारोह का उद्घाटन करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य को लोग देख नहीं पाते, क्योंकि प्रदेश को लेकर ये अफवाह है कि यहां नक्सलियों की संख्या ज्यादा है। लोग छत्तीसगढ़ आने से डरते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। पिछले 3 सालों में हमने नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। यहां नक्सल घटनाओं में काफी कमी आई है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव हमने आयोजित किया वह अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो गया है, बस्तर में बादल नाम से संस्था बनाई है, जिसमें वहां की भाषा, संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम होता है, वहां विलुप्त हो रही नृत्य शैली को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। पहली बार राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव का आयोजन हो रहा है, मुख्यधारा और आदिवासी समाज के बीच में सेतु नहीं है, तीन दिवसीय कार्यक्रम निश्चित रूप से दोनों धाराओं के बीच में सेतु का काम करेगा।

सीएम ने कहा कि आदिवासियों को नमक के अलावा किसी चीज की आवश्यकता नहीं थी उन्हें सभी चीज जंगल में मिल जाती थीं लेकिन धीरे-धीरे वृक्ष कटते गए हमने पिछले तीन साल में सुनिश्चित किया है कि जंगल में फलदार वृक्ष ही लगेंगे, इससे आदिवासियों की आवश्यकता भी पूरी होगी। हम आदिवासियों से लघु वनोपज भी खरीद रहे हैं। जो प्रजाति लुप्त हो रही है उसे भी हमें बचाना है।

पाठ्यक्रम में शामिल होगी 16 तरह की बोली
सीएम ने कहा कि राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में विदेशों से भी कलाकार आए और यहां एक अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम हुआ। यहां की बहुत सारी जनजातीय बोलिया सिमटती जा रही है। उसका अस्तित्व समाप्त हो रहा है और संस्कृति विलुप्त हो रही है। इस बात को ध्यान रखते हुए पढ़ाई के लिए 16 तरह की बोली भाषाओं में पाठ्यक्रम रखा गया है। बच्चों को अपनी मातृ बोली के प्रति प्रेम होगा तो बच्चे सीखेंगे भी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार विभिन्न जनजातियों को सहेजने का काम कर रही है।

जंगल है तो हम हैं-मंत्री प्रेमसाय
आदिम जाति कल्याण मंत्री प्रेमसाय सिंह ने कहा कि तीन दिवसीय जनजातीय महोत्सव की आज शुरुआत हुई है। प्रदेश में 42 जनजातीय समुदाय निवासरत है। सभी को अच्छी शिक्षा मिले इसके लिए हमारी सरकार ने व्यवस्था की है। आदिवासी जंगल का संरक्षण करते हैं, अगर जंगल है तो हम है। कोरोना काल में जब उद्योग धंधे बंद थे, उस समय छत्तीसगढ़ से 80 प्रतिशत वनोपज की खरीदी की गई। आदिवासियों की संस्कृति, परंपरा अलग होती है। आदिवासियों के साहित्य व उनके रहन सहन उनके बारे में लिखा जाना चाहिए। महोत्सव में स्थानीय साहित्यकार अपने द्वारा किए गए शोध, लेख को आमजनता के समक्ष पेश करेंगे। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होगा।


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