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मध्य प्रदेश और ओडिशा में पत्रकारों से हुई बदसलूकी की एडिटर्स गिल्ड ने कड़ी निंदा की है.
गिल्ड ने एक बयान जारी कर गृह मंत्रालय से अपील की है कि वो पत्रकारों और सिविल सोसाइटी मेंबर्स के ख़िलाफ़ पुलिस की ज़्यादतियों का तत्काल संज्ञान लेकर इसके ख़िलाफ़ सख़्त निर्देश जारी करें.
गिल्ड ने ये भी कहा है कि सत्ता की शक्ति का गलत इस्तेमाल करने वालों पर भी सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए. एडिटर्स गिल्ड ने अपने बयान में दोनों ही ज़िलों में हुई घटनाओं का ज़िक्र किया है.
बयान में कहा गया है कि मध्य प्रदेश के सीधी में एक स्थानीय पत्रकार और कुछ सिविल सोसाइटी के सदस्यों को गिरफ़्तार करने, निर्वस्त्र करने और अपमानित करने से गिल्ड हैरान है.
बता दें कि इस मामले से जुड़ी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. तस्वीर 2 अप्रैल की सीधी कोतवाली की है. तस्वीर में दिख रहे आठ अर्धनग्न लोगों में से दो स्थानीय पत्रकार हैं और बाकी लोग नाट्यकर्मी हैं.
आरोप है कि ये लोग एक स्थानीय रंगकर्मी की गिरफ़्तारी का विरोध कर रहे थे जिसके बाद पुलिस ने इन सभी को पकड़ कर उनके कपड़े उतरवाए और थाने में इनकी परेड निकाली.
गिल्ड के बयान में कहा गया है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया है और इस जघन्य मामले की जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन पत्रकारों पर पुलिस और स्थानीय प्रशासन की बेरहमी और डराने-धमकाने की ये बढ़ती प्रवृत्ति बेहद परेशान करने वाली है और इसकी जांच की जरूरत है.
ओडिशा का मामला क्या है?
एडिटर्स गिल्ड ने ओडिशा के मामले का ज़िक्र करते हुए लिखा है कि बालासोर ज़िले के अस्पताल में एक पत्रकार के पैर को ज़ंजीर से बांध दिया गया.
पत्रकार का दावा है कि भ्रष्टाचार से जुड़ी एक ख़बर प्रकाशित करने को लेकर उसके साथ ऐसा सलूक किया गया है. न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, अब इस मामले में ओडिशा डीजीपी ने जांच के आदेश दे दिए हैं. (bbc.com)


