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राज्यों के प्रस्तावों पर विचार करते हुए जनजातियों के विकास की दिशा में काम कर रही सरकार: मुंडा
01-Apr-2022 7:49 PM
राज्यों के प्रस्तावों पर विचार करते हुए जनजातियों के विकास की दिशा में काम कर रही सरकार: मुंडा

नयी दिल्ली, एक अप्रैल। जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि विभिन्न राज्यों में कुछ समुदायों को अनुसूचित जनजातियों में शामिल करने के उनके प्रस्तावों पर विचार करते हुए केंद्र सरकार जनजातीय समुदाय के विकास के समाधान तलाश रही है।

मुंडा ने सदन में ‘संविधान (अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां) आदेश (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2022’ पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए यह बात कही।

उत्तर प्रदेश में ‘गोंड’ समुदाय से संबंधित इस विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि आज सदन में उत्तर प्रदेश से संबंधित विधेयक पारित किया जा रहा है, इससे पहले सरकार ने कर्नाटक, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा के इस तरह के प्रस्तावों पर विचार किया था और हम भविष्य में झारखंड, छत्तीसगढ़ तथा ओडिशा के ऐसे प्रस्तावों की समीक्षा करने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार देश में जनजातीय समुदाय और उनके क्षेत्रों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और यह विधेयक उसी कड़ी में समाधान का रास्ता है।

मंत्री के जवाब के बाद सदन ने विपक्षी सदस्य एन के प्रेमचंद्रन के कुछ संशोधनों को अस्वीकृत करते हुए विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

जनजातीय समुदाय के दयनीय स्थिति में होने के विपक्षी सदस्यों के कथन पर मुंडा ने कहा कि सरकार आदिवासी समाज के विकास के लिए किये गये पिछले सात साल का हिसाब देने को तैयार है लेकिन उससे पहले का हिसाब तो कांग्रेस को देना होगा।

उन्होंने कहा कि यह समुदाय दयनीय स्थिति में नहीं है, वह जहां है अपनी संस्कृति और परंपराओं के साथ खुश रहता है। यह समुदाय हमेशा अपने वृक्षों, जंगलों, पेड़ों और नदियों से प्यार करते हुए उनके बीच ही निश्छल भाव से रहना चाहता है और खुशियां खरीदने बाजार में नहीं जाता।

अलग-अलग राज्यों के इस तरह के प्रस्ताव सदन में एक साथ नहीं लाने के कुछ विपक्षी सदस्यों के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अनुसूचित जनजातियों के संबंध में सभी राज्यों की अलग-अलग सूची होती है और सब अपने-अपने हिसाब से अनुसंधान करके तय करते हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सिफारिश करते हैं, जिस पर केंद्र पूरे देश में सलाह-मशविरा के बाद निर्धारित मानकों के आधार पर समीक्षा करता है और फिर विषय को सदन में चर्चा के लिए लाया जाता है।

मुंडा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी कहा है कि इस तरह के मामलों में स्पेलिंग आदि की कोई त्रुटि हो तो इसी सदन में उस पर चर्चा हो सकती है।

उत्तर प्रदेश में गौंड जाति से संबंधित इस विधेयक को पुन: सदन में लाने के सवाल पर जनजातीय मंत्री ने कहा कि 2002 में जब विधेयक पारित हुआ था, तभी प्रदेश में कुछ जिलों का विभाजन हुआ था, लेकिन उसकी सूचना सदन को प्राप्त नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि जिले विभाजित होने की अधिसूचना जारी होने और नये जिले का नामकरण नहीं होने से लोगों को विधेयक पारित होने के बाद भी सुविधा प्राप्त नहीं हो रही थी, इसलिए यह विधेयक लाना आवश्यक था।

लोकसभा में इस विधेयक को लाने का संबंध उत्तर प्रदेश चुनाव से होने के विपक्षी सदस्यों के आरोपों को खारिज करते हुए मुंडा ने कहा कि राज्य में विधानसभा चुनाव तो हो चुके हैं और यह विधेयक चुनाव से जुड़ा नहीं है।

उन्होंने कहा कि देश में संघीय ढांचे के तहत चुनाव तो सतत प्रक्रिया है और देश में किसी न किसी राज्य में चुनाव चलते रहते हैं। मुंडा ने कहा कि इसी तरह की परिस्थिति के मद्देनजर सरकार ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की सोच को आगे रखा है जिस पर आगे सभी से विचार करके काम किया जाएगा।

मुंडा ने कुछ आंकड़े रखते हुए कहा कि 2013-14 में मोदी सरकार आने से पहले देश में स्वीकृत एकलव्य स्कूलों की संख्या 168 थी जो आज 700 से ज्यादा है। इसी तरह 2013-14 में इस तरह के 119 विद्यालय संचालित थे जबकि आज ऐसे 367 विद्यालय संचालित हैं।

विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार की सिफारिश के आधार पर यह प्रस्ताव किया गया है कि संविधान अनुसूचित जातियां आदेश 1950 और संविधान अनुसूचित जनजातियां (उत्तर प्रदेश) आदेश 1967 का संशोधन करके उत्तर प्रदेश राज्य के संबंध में इनकी सूचियों में बदलाव किया जाए।

यह विधेयक संविधान अनुसूचित जातियां आदेश 1950 की अनुसूची के भाग 18 - उत्तर प्रदेश की प्रविष्टि 36 में संत कबीर नगर, कुशीनगर, चंदौली और संत रविदास नगर जिलों से ‘गोंड’ समुदाय को लोप करने के लिये है।

इसे संविधान अनुसूचित जनजातियां उत्तर प्रदेश आदेश 1967 की प्रविष्टि 6 में संत कबीर नगर, कुशीनगर, चंदौली और संत रविदास नगर जिलों को शामिल करने के लिये लाया गया है। (भाषा)


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