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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 30 मार्च। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि अविवाहित पुत्री अपने विवाह के लिये अपने पिता से भरण-पोषण अधिनियम के तहत खर्च की राशि देने का दावा कर सकती है।
भिलाई स्टील प्लांट से रिटायर्ड भानूराम की बेटी राजेश्वरी ने सन् 2016 में हाईकोर्ट में याचिका पेश कर बताया था कि उसके पिता को रिटायरमेंट पर 75 लाख रुपये का भुगतान प्राप्त हुआ है। पिता को हाईकोर्ट आदेश दे कि इसमें से 25 लाख रुपये उसके विवाह के लिए पिता उसे दें। हाईकोर्ट ने उसे हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम 1956 की धारा 20(3) के प्रावधानों के तहत परिवार न्यायालय में आवेदन लगाने की छूट दी। याचिकाकर्ता ने दुर्ग के परिवार न्यायालय में आवेदन लगाया। इसमें उसने खुद के विवाह के खर्च के लिये 25 लाख रुपये देने की मांग की। परिवार न्यायालय में याचिका खारिज होने पर अविवाहित बेटी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। हाईकोर्ट ने युवती के पक्ष में फैसला देते हुए कहा है कि अविवाहित बेटी हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम 1956 की धारा 20(3) के तहत अपने पिता से विवाह के खर्च के लिये राशि प्राप्त करने का अधिकार रखती है।


