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बिहारी बाबू ही नहीं, अब बंगाली बाबू भी कह रहे हैं लोग-शत्रुघ्न सिन्हा
29-Mar-2022 11:33 AM
बिहारी बाबू ही नहीं, अब बंगाली बाबू भी कह रहे हैं लोग-शत्रुघ्न सिन्हा

   लोकसभा उपचुनाव विशेष रिपोर्ट - 1  

आसनसोल से बिकास के शर्मा

पश्चिम बंगाल के आसनसोल में लोकसभा के उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के प्रार्थी सह सिने अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा को लेकर उनकी प्रतिद्वंदी भाजपा प्रार्थी सह आसनसोल दक्षिण से विधायक अग्निमित्रा पॉल ने एक सप्ताह पूर्व ही एक बयान दिया। सुश्री पाल ने कहा कि शत्रुघ्न सिन्हा बाहरी हैं इसलिए यहां के लोगों को उन्हें वोट देने से कोई फायदा नहीं मिलने वाला। इस बयान ने शिल्पांचल एवं कोयलांचल के नाम से मशहूर आसनसोल में राजनीतिक पारा बढ़ा दिया है।

ज्ञातव्य हो कि साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने गैर बंगालियों को राज्य का महमान कहा था, जिसके बाद चुनाव में गैर बंगलियों के एक बड़े वर्ग ने बयान के खिलाफ अपनी भावनाएं व्यक्त की थीं, जिसका परिणाम पार्टी को हार के रूप में मिला था। इसके बाद से ही आसनसोल एवं पुरुलिया के रास्ते पूरे बंगाल में भाजपा की बढ़त शुरू हो गई थी।  स्थानीय लोगों में अब लगातार यह सवाल कौंध रहा है कि क्या इस बार भाजपा प्रार्थी सुश्री पाल का बयान उनके लिए खतरा बनेगा और पार्टी को 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में मिली करीब 2 लाख की बढ़त को डेंट लग सकता है। लेकिन इस पूरे प्रकरण पर जब इन पंक्तियों के लेखक ने जब शत्रुघ्न सिन्हा से बात की, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा प्रार्थी को लेकर उन्हें कुछ भी नहीं कहना है और न वे कहेंगे किंतु इस बात पर उन्होंने जोर जरूर दिया कि आसनसोल आगमन के पूर्व बिहारी बाबू के नाम से उन्हें जो प्रसिद्धि मिली थी वह अब दुगनी हो गई है। साथ ही श्री सिन्हा ने बताया कि आसनसोल क्षेत्र में यूपी, सीमावर्ती झारखंड, बिहार, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और गुजरात की संस्कृति से जुड़े लोगों की निर्णायक आबादी पिछले सौ से भी अधिक वर्षों से रह रही है, और वे लोग उन्हें अपना भरपूर समर्थन दे रहे हैं।

बंगाल की भाषा, लहजे, खानपान से वे पहले से ही जुड़े रहे हैं इसलिए अब वे केवल बिहारी बाबू नहीं अपितु बंगाली बाबू भी हो चुके हैं जिसका उन्हें गर्व है। यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने तृणमूल नेत्री से पार्टी में शामिल होने को लेकर कोई बात की थी तो श्री सिन्हा ने कहा - मुझे अचानक बंगाल की शेरनी ममता जी का फोन आया। उन्होंने मुझे कहा कि आसनसोल की जनता आपको याद कर रही है। सुश्री बनर्जी ने यह भी बताया कि उन्होंने खुद ही इस सूचना का ट्वीट किया है, जिसके बाद मेरे पास युद्ध में कूदने के सिवाय कोई रास्ता नहीं था। ममता जी देश में विपक्ष की सबसे मजबूत और फिलहाल दिख रहीं एकमात्र नेत्री हैं, उनका अनुरोध मेरे लिए आदेश है।

यह पूछे जाने पर कि क्या साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की 2 लाख की जीत की खाई को पार्टी भर पाएगी तो श्री सिन्हा ने कहा कि इस बार आसनसोल में केवल एक ही लहर है वो है ममता बनर्जी। सुश्री बनर्जी ने खुद आसनसोल के चुनाव की बागडोर संभाल रखी है। जनता ने भाजपा के धनबल, बाहुबल, केंद्रीय एजेंसी, ईवीएम घोटाला आदि सबको विगत साल हुए विधानसभा चुनाव में परास्त कर तृणमूल को हैट्रिक जीत दिलाई है, साथ ही हालिया निकायों के चुनाव में भी पार्टी पर जनता ने एकतरफा भरोसा जताया है। इसका सीधा असर इस चुनाव पर पड़ेगा क्यों कि जनता विभाजन करने वालों को नहीं बल्कि विकास करने वाली नेत्री (ममता)को वोट करेगी।

उन्होंने कहा कि आसनसोल कोयला और उद्योग क्षेत्र है किंतु केंद्र की गलत नीतियों के कारण यहां के लोग बंगलुरु, पुणे, मुंबई, गुडग़ांव आदि जगहों पर काम हेतु जा रहे हैं। उनका मुख्य उद्देश्य केंद्रीय उपक्रमों को पुनर्जीवित करने की लड़ाई लडऩा होगा। श्री सिन्हा ने कहा कि देशभर में ममता बनर्जी के हाथ को मजबूत करने के लिए वे बंगाल तृणमूल की टीम के संग राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर एवं यशवंत सिन्हा सहित विपक्षी नेताओं के संग काम करेंगे। अगले लोकसभा के आम चुनाव में देश की जनता के समक्ष ममता दीदी प्रधानमंत्री के रूप में टेस्टेड एंड ट्रायल्ड मॉडल हैं। उन्होंने कहा कि अमित शाह और मोदी की भाजपा का पार्टी के मूल उद्देश्यों एवं अटलबिहारी बाजपाई, लालकृष्ण आडवाणी, मुरलीमनोहर जोशी आदि संस्थापकों से कोई सरोकार नहीं है, इसलिए वे तृणमूल में आने पर काफी खुश हैं।


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