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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 27 मार्च। छत्तीसगढ़ के बस्तर में 2013 में बीजापुर जिले के एडसमेटा में सुरक्षा बलों की गोलियों से 8 बेकसूर आदिवासी ग्रामीणों की मौत की जांच रिपोर्ट आने के बाद अब नक्सल संगठन ने याद दिलाया है कि सुरक्षाबलों ने उस वक्त नक्सलियों को मार गिराने का झूठा प्रचार किया था। आज जारी एक बयान में बस्तर के नक्सल संगठन ने लिखा है कि उस वक्त की भाजपा सरकार ने यह जांच जस्टिस वी के अग्रवाल को 6 महीने में पूरी करने के लिए दी थी जिसे पूरा करने में 8 बरस लगाए गए। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि अपना एक त्यौहार मना रहे बेकसूर ग्रामीण आदिवासियों पर सुरक्षाबलों ने 44 गोलियां चलाई थी जिनसे 8 बेकसूर मारे गए थे, जिनमें 4 बच्चे शामिल थे। इस बयान में कहा गया है कि इस पूरी जांच रिपोर्ट में यह तो कहा गया है कि पुलिस बल कैसे सतर्क रहें, लेकिन इस जनसंहार में शामिल पुलिस बल पर कार्यवाही कर उसे सजा देने के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा गया है। नक्सल संगठन ने इस बात पर भी आपत्ति की है कि विधानसभा में यह रिपोर्ट पेश करने वाली बघेल सरकार ने भी न तो इस जनसंहार में शामिल पुलिस बल पर एफ आई आर की, न किसी को नौकरी से बर्खास्त किया।


