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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 23 मार्च। पं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के सेवानिवृत्त प्राध्यापक को सातवें वेतन आयोग से वंचित रखने पर हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग और यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
विश्वविद्यालय में भूगोल संकाय के अध्यापक के रूप में सेवाएं दे चुके डॉ एनके बाघमार की सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें निर्धारित पेंशन, सेवानिवृत्ति लाभ आदि की गणना छठे वेतन आयोग के आधार पर की जा रही जिससे वे सातवें पे कमीशन के लाभ से वंचित है। डॉ. बाघमार को जनवरी 2016 से जून 2018 तक की एरियर्स की रकम भी नहीं मिली।
इससे छुब्ध होकर उन्होंने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और हर्ष मंदिर रस्तोगी के माध्यम से सेवा याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि अपने जीवन काल के लगभग 35 वर्ष की अनवरत सेवा के पश्चात भी याचिकाकर्ता के पेंशन का निर्धारण नियमानुसार न करके अनुचित ढंग से किया गया, जो सर्वथा नियम विरुद्ध है और इससे उनको क्षत्ति हो रही है।
गौरतलब है कि वर्ष 2016 में केंद्र और राज्य शासन ने सातवां वेतन आयोग लागू कर दिया था परंतु याचिकाकर्ता को मासिक वेतन भी जून 2018 तक छठे वेतन आयोग के अनुसार ही दिया गया। जबकि उनकी सेवानिवृत्ति अगस्त 2021 में हुई थी। याचिकाकर्ता डॉक्टर बाघमार ने विभाग में अनेक लिखित आवेदन दिए किंतु उन पर किसी प्रकार का विचार कर निराकरण नहीं किया गया।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस पी सैम कोसी की बेंच में हुई। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव तथा पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।


