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रमन सरकार में भी कंपनी को उपकृत किया गया...
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 23 मार्च। घटिया हाईब्रिड बीज सप्लाई के केस में हैदराबाद की जिस कंपनी को प्रतिबंधित किया गया है, वह पिछले कई सालों से प्रदेश में बीज सप्लाई करती रही है। साथ ही शिकायतों के बाद भी कंपनी को उपकृत किया जाता रहा है। बताया गया कि कंपनी के ब्लैकलिस्ट होने के बाद भी ढाई करोड़ से अधिक भुगतान करने के मामले में बीज निगम के चेयरमैन और दो आईएएस अफसरों पर गाज गिर सकती है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मंगलवार को घटिया हाईब्रिड बीज सप्लाई के मामले पर सदन की कमेटी से जांच कराने की घोषणा की। विधानसभा की कमेटी हाईब्रिड बीज की सप्लाई प्रकरण की जांच पर विधानसभा के मानसून सत्र में अपनी रिपोर्ट देगी। भूपेश सरकार के तीन साल के कार्यकाल में यह पहला मौका है, जब किसी केस की जांच विधानसभा की कमेटी कर रही है।
बताया गया कि घटिया हाइब्रिड बीज सप्लाई करने वाली हैदराबाद की कंपनी त्रिमूर्ति प्लांट साइंस फर्म के खिलाफ पहले भी शिकायतें आती रही हैं। कंपनी करीब 10 साल से यहां हाईब्रिड बीज की सप्लाई करती रही है, और अमानक बीज की शिकायतों को अनदेखा किया जाता रहा है। पिछले सत्र में घटिया हाईब्रिड बीज की सप्लाई की शिकायतों को कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने सही माना था। और कंपनी को प्रतिबंधित कर भुगतान रोकने के आदेश दिए थे।
सूत्र बताते हैं कि कंपनी ने करीब 5 करोड़ से अधिक की हाइब्रिड बीज सप्लाई की थी। कृषि मंत्री के भुगतान रोकने के आदेश के बाद भी बीज निगम ने न सिर्फ कंपनी को प्रतिबंधित सूची से हटा दिया बल्कि दो करोड़ 61 लाख का भुगतान भी कर दिया। कहा जा रहा है कि बीज निगम के चेयरमैन अग्नि चंद्राकर के साथ ही साथ निगम में एमडी रहे दो आईएएस अफसर मुश्किल में घिर सकते हैं।
चर्चा है कि विधानसभा में कंपनी को प्रतिबंधित किए जाने के बाद भी बहाल किया गया, और फिर भुगतान किया गया। खुद कृषि मंत्री ने इस बात को माना है। अगले कुछ दिनों में जांच की प्रक्रिया शुरू होगी, और फिर इसके बाद भुगतान की प्रक्रिया से जुड़े सभी अफसरों को जवाब-तलब किया जा सकता है। बहरहाल, प्रकरण को लेकर आने वाले दिनों में राजनीति गरम रहेगी।


