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रायपुर, 21 मार्च। छत्तीसगढ़ के बस्तर में 2013 में बीजापुर जिले के एडसमेटा में सुरक्षा बलों, सीआरपीएफ, की गोलियों से आठ बेकसूर आदिवासियों की हत्या पर नक्सलियों ने आज एक बयान जारी करके पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, तत्कालीन गृह मंत्री, और तत्कालीन डीजीपी पर एफआईआरदर्ज करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश की वर्तमान भूपेश बघेल सरकार पर भी आदिवासी विरोधी होने का आरोप लगाया है।
उल्लेखनीय है कि 2013 में सीआरपीएफ की गोलियों से एक आदिवासी समारोह मना रहे बेकसूर और निहत्थे ग्रामीणों में से 8 लोगों की मौत हुई थी जिनमें तीन नाबालिग भी थे। इस पर बने एक सदस्यीय, वी के अग्रवाल, जांच आयोग की रिपोर्ट अभी छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश की गई और इस पर दोषियों पर कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए माओवादियों ने एक बयान में यह कहा है कि जो आदिवासी विधायक इस पर सवाल नहीं उठा रहे हैं उन्हें गांवों में नहीं घुसने देना चाहिए। इसके साथ ही कहा गया है कि हत्याकांड के बारे में एक भी शब्द न बोलने वाली भाजपा और कांग्रेस पार्टियों के आदिवासी नेताओं को भी गांव में नहीं घुसने देना है।
बयान में कहा गया है कि केंद्र की मोदी सरकार की आड़ में राज्य में कांग्रेस सरकार आए दिन बेकसूर आदिवासियों को झूठी मुठभेड़ों में मार रही है और हिंदुत्व के एजेंडे को जबरन लागू करते हुए आदिवासियों का कत्ल कर रही है। बयान में कहा गया है कि बस्तर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है और मानवाधिकारों का कोई नामोनिशान नहीं है।


