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हाथियों को पाल कर रखे अफसरों को एटीआर में अचानक पहुंचे जंगली हाथियों का खौफ
10-Mar-2022 1:31 PM
हाथियों को पाल कर रखे अफसरों को एटीआर में अचानक पहुंचे जंगली हाथियों का खौफ

हाईकोर्ट के आदेश के बाद सिर्फ एक को भेजा गया था पुनर्वास केंद्र, सैलानियों को भी खतरा
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 10 मार्च।
अचानकमार टाइगर रिजर्व के सिंहावल में पाल कर रखे गये तीन हाथी अब जंगल के अफसरों पर भारी पड़ सकते हैं क्योंकि उनसे मिलने जंगली हाथी भी उनके करीब पहुंच चुके हैं।

बीते कुछ समय से अचानकमार टाइगर रिजर्व में जंगली हाथियों ने डेरा जमा रखा है। ये हाथी सिंहावल के उसी जगह के करीब हैं, जहां वन विभाग के हाथी राजू, लाली और शावक रखे गए हैं। यहां सरगुजा से लाए गए नर हाथी सिविल बहादुर को तमोर पिंगला के पुनर्वास केंद्र में भेजा जा चुका है। जानकारी के अनुसार यहां बाहर से लाए गए चार कुमकी हाथी भी रहते हैं।

देश में ख्यातिलब्ध मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ में भी सीधी से लाए गए थे। हाथियों के बाद जंगली हाथी जब वहां पहुंचे तो कई दिनों तक खतौली गेट सैलानियों के लिए बन्द करने की नौबत आ गई थी, क्योंकि जंगली हाथियों के यहां की राह देख ली थी। खबर के अनुसार महावतों से कहा गया है- जैसे ही जंगली हाथियों के इन हाथियों के करीब आने का अहसास हो तो इन्हें खोल कर दूसरी तरफ ले जाएं। 15 से 18 जंगली हाथियों का दल पालतू हाथियों के लिये तो खतरा बन सकते हैं ही, सैलानियों को भी इनसे जोखिम हो सकता है।  

पर्यावरण व वन्य जीव प्रेमी वरिष्ठ पत्रकार प्राण चड्ढा बताते हैं कि जंगली हाथी इंफ्ऱासांउड से 16 मील दूर तक आपस में संवाद कर सकते हैं। जंगल पहाड़ों में एरियल डिस्टेंस की वजह से पेड़ों के अवरोध बाद भी यह तीव्र होता है। यह ध्वनि इंसानों के कान नहीं सुन सकते।

जंगल के कई रहस्य ऐसे हैं जिससे काफी समय बाद समझा जा सका है और अभी समझना बाकी है। मिलन की ऋतु में चीतल की कान्हा और अचानकमार में बड़े झुंडों का बन जाना भी ऐसा ही कुछ होता है।

अचानकमार में जंगली हाथियों का सिंहावल के इलाके में आने के पीछे भी ऐसे ही कारण हैं। नर हाथी मदकाल में मादा के लिए इतना मदमस्त और आक्रामक हो जाता है कि वह किसी की नहीं सुनता। यदि  अचानकमार टाइगर रिजर्व पहुंचे हाथियों के दल में मदमस्त नर हैं तो सैलानियों के लिए और खतरा होगा। इन बिन बुलाए मेहमानों के सामने पालतू हाथी राजू भी नहीं टिक पायेगा।

चड्ढा  के अनुसार पालतू हाथियों को जंगली हाथियों के आने पर दूर ले जाने का आदेश जिस अधिकारी ने दिया है उनको वन्यजीवों और उनकी हिफाजत का कितना ज्ञान है, इससे पता चलता है। दरअसल, इसके पहले ही सिंहावल से तीनों हाथियों को हटाने पर विचार जरूरी है। यदि कोशिश की जाए तो इन तीनों हाथियों को इस दल के साथ जंगल वापसी भी मैत्रीपूर्ण ढंग से हो सकती है। लेकिन यह काम धीरज और जोखिम का है, जिसे विशेषज्ञ ही कर सकते हैं।  

हाथियों के जानकार नितिन सिंघवी का कहना है कि हाईकोर्ट में उनकी याचिका पर अचानकमार से सिविल बहादुर को तमोर पिंगला हाथी पुनर्वास केंद्र भेजा गया था। पर वन विभाग ने तीन हाथियों को वानिकी के कामों के लिए रख लिया है। हाथी पुनर्वास केंद्र में इस समय दस हाथियों की जगह है। वहां ये तीन हाथी और रह सकते हैं। यहां से भेजे सिविल बहादुर और राजू में पहले से मित्रता है। इससे कोई टकराव की नौबत नहीं आएगी।


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