ताजा खबर
नई दिल्ली. रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन का कहना है कि रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध से भारत सहित दुनियाभर में महंगाई बढ़ेगी तथा अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होगी. अपनी ग्रोथ को बरकरार रखना देशों के लिए मुश्किल हो जाएगा.
सीएनबीसी-टीवी 18 को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में रघुराम राजन ने कहा कि क्रूड ऑयल, गेहूं सहित कई कमोडिटी की कीमतों में तेजी आई है. दुनिया के कई देशों में पहले से ही महंगाई ज्यादा थी. अगर आप इसमें लड़ाई को जोड़ दें तो महंगाई और बढ़ जाएंगी और ग्रोथ घटेगी. दोनों मिलकर इन्फ्लेशन पर असर डालेंगे.
लंबे समय तक रहेगी महंगाई
रघुराम राजन का कहना है कि अमेरिका और यूरोप में ऐसी स्थिति दिख रही है. लड़ाई के चलते इनफ्लेशन पर दबाव और बढ़ जाएगा. इस बात की पूरी संभावना है कि इनफ्लेशन के खिलाफ लड़ाई लंबी खिंचेगी. यह अच्छी खबर नहीं है.
विज्ञापन
रूस पर अमेरिका और अन्य देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के प्रभाव के बारे में रघुराम राजन ने कहा कि मेरा मानना है कि इन प्रतिबंधों के गंभीर नतीजे होंगे. यूक्रेन पर रूस के हमले से पश्चिमी देश एकजुट हुए हैं. जापान भी उनके साथ है. पश्चिमी देश प्रतिबंध कड़ाई से लागू करना चाहते हैं. इन प्रतिबंधों का असर जरूर होगा. रूस एनर्जी सहित कई कमोडिटीज का बड़ा एक्सपोर्टर है. रूस पर प्रतिबंध से इनकी सप्लाई बाधित होगी. इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव होगा.
दुनिया के सामने क्या विकल्प है?
रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर का कहना है कि सप्लाई के दूसरे स्रोतों के प्रयोग से इस हानि को कम किया जा सकता है. क्रूड ऑयल के लिए वेनेजुएला और ईरान से बातचीत हो रही है. ईरान से अगर क्रूड की सप्लाई शुरू होती है तो यह एक अच्छी खबर होगी. दूसरा, शेल एनर्जी में फिर से दिलचस्पी दिखेगी. इसलिए अगले कुछ महीनों में ऊंची कीमतों के चलते सप्लाई के दूसरे स्रोतों का इस्तेमाल शुरू होगा. ज्यादा कीमतों की वजह से मांग में भी कमी आएगी. रघुराम राजन का कहना है कि जरूरी चीजों की सप्लाई में रूस का बड़ा रोल है. दुनिया अभी कार्बन एनर्जी पर बहुत ज्यादा निर्भर है. इसमें कमी लानी होगी. रिन्यूएबल एनर्जी पर फिर से फोकस बढ़ सकता है.


